चांडिल मुख्य नहर की बदहाल स्थिति पर सरयू राय ने उठाए सवाल, किसानों की सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग
जमशेदपुर, 13 जुलाई: जनता दल (यूनाइटेड) के विधायक सरयू राय ने स्वर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना की चांडिल की बांयीं मुख्य नहर की जर्जर स्थिति को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने जल संसाधन विभाग के सचिव को पत्र भेजकर कहा है कि सरकार उद्योगों को पानी उपलब्ध कराकर हर वर्ष भारी राजस्व अर्जित कर रही है, लेकिन इसी परियोजना पर निर्भर किसानों को पर्याप्त सिंचाई सुविधा नहीं मिल रही है।
सरयू राय ने बताया कि करीब 128 किलोमीटर लंबी चांडिल बांयीं मुख्य नहर का निर्माण लगभग तीन दशक पहले हुआ था। इसके बाद नहर और उसकी वितरण प्रणाली के रखरखाव एवं मरम्मत पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया, जिससे इसकी सिंचाई क्षमता लगातार घटती जा रही है।
उन्होंने कहा कि नहर के अधिकांश हिस्सों में झाड़ियां उग आई हैं, बड़ी मात्रा में गाद जमा हो चुकी है और कई स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त हैं। यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो खरीफ सीजन में किसानों को गंभीर सिंचाई संकट का सामना करना पड़ सकता है।
विधायक ने आरोप लगाया कि स्वर्णरेखा परियोजना का पानी उद्योगों को उपलब्ध कराकर सरकार को हर वर्ष करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। उनका दावा है कि केवल टाटा स्टील से ही सरकार को सालाना 700 करोड़ रुपये से अधिक की आय होती है, लेकिन इस राशि का उपयोग नहरों के रखरखाव और सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने में नहीं किया जा रहा है।
सरयू राय ने कहा कि मौसम विभाग द्वारा इस वर्ष सामान्य से कमजोर मानसून की संभावना जताई गई है। ऐसे में कृषि के लिए सिंचाई व्यवस्था और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में चांडिल बांयीं मुख्य नहर तथा उसकी पूरी वितरण प्रणाली की व्यापक मरम्मत और सुदृढ़ीकरण के लिए विशेष बजटीय प्रावधान किया जाए, ताकि किसानों को खरीफ और रबी दोनों फसलों के लिए पर्याप्त सिंचाई सुविधा मिल सके।
