Home

छिन्नमस्तिका मंदिर विवाद में दुकानदारों को राहत, HC ने एक महीने में पुनर्वास का आदेश

Ramgarh/Ranchi : मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर में दुकानों को खाली कराने के नोटिस के खिलाफ दुकानदारों को झारखंड हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि बिना पुनर्वास के किसी भी दुकानदार को हटाना सही नहीं होगा। साथ ही जिला प्रशासन को एक महीने के भीतर सभी प्रभावित लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। 

जस्टिस आनंद सेन की अदालत का अहम आदेश

इस मामले की सुनवाई जस्टिस आनंद सेन की अदालत में हुई। दुकानदारों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने प्रशासन को सख्त निर्देश दिया कि सभी प्रभावित दुकानदारों के लिए एक महीने के भीतर वैकल्पिक जगह की व्यवस्था की जाए। कोर्ट ने प्रशासन से इस मामले में जवाब भी मांगा है।

दुकानदारों ने क्या कहा

अरूप कुमार पंडा समेत अन्य दुकानदारों ने याचिका दायर कर कहा था कि प्रशासन ने दुकान खाली करने का नोटिस तो दे दिया, लेकिन पुनर्वास की कोई स्पष्ट योजना नहीं बताई। उनका कहना था कि वे वर्षों से मंदिर परिसर में कारोबार कर रहे हैं और अचानक हटाने से उनकी रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा।

पुराने आदेश से जुड़ा है मामला

दरअसल, यह पूरा मामला 11 अगस्त 2023 को दायर एक जनहित याचिका से जुड़ा है। उस समय हाई कोर्ट ने मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण को लेकर निर्देश दिए थे। कोर्ट ने भैरवी नदी किनारे से अतिक्रमण हटाने और पूरे इलाके को व्यवस्थित करने को कहा था।

पुनर्वास के साथ ही हटाने की शर्त

कोर्ट ने अपने पुराने आदेश में यह भी साफ किया था कि अतिक्रमण हटाने के साथ दुकानदारों का पुनर्वास भी जरूरी है। प्रशासन को तीन महीने के भीतर कार्रवाई पूरी करने को कहा गया था। इसी के तहत हाल में दुकानदारों को नोटिस जारी कर जगह खाली करने को कहा गया।

अब प्रशासन के सामने बड़ी जिम्मेदारी

ताजा आदेश के बाद अब जिला प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। कोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के कार्रवाई नहीं चलेगी। अब एक महीने के भीतर पुनर्वास करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।

फिलहाल दुकानदारों को राहत

हाई कोर्ट के इस फैसले से दुकानदारों को बड़ी राहत मिली है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रशासन तय समय में पुनर्वास की व्यवस्था कैसे करता है और आगे कोर्ट में क्या जवाब देता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *