पश्चिमी सिंहभूमि

स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की तैयारी , 20 मिनी कोल्ड स्टोरेज पर जोर

पश्चिमी सिंहभूम, 11 सितंबर :

पश्चिमी सिंहभूम जिले के कृषि, वन और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में जिला प्रशासन ने प्रयास तेज करने का निर्णय लिया है।

शुक्रवार को जिला समाहरणालय सभागार में उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में जिला स्तरीय निर्यात प्रोत्साहन समिति की बैठक हुई। इसमें जिले के प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय उत्पादों की निर्यात क्षमता पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक ने जिले में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भारी इंजीनियरिंग उत्पादों के चयन से संबंधित जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि पश्चिमी सिंहभूम लौह अयस्क और चूना पत्थर जैसे खनिज संसाधनों से समृद्ध है। इसके साथ ही खाद्य प्रसंस्करण, रेशम तथा अन्य स्थानीय उत्पादों को भी बेहतर ढंग से तैयार कर बाहरी बाजारों तक पहुंचाया जा सकता है।

चेंबर प्रतिनिधियों ने जिले में उपलब्ध लघु वन उत्पादों की ओर भी समिति का ध्यान आकृष्ट कराया। नीम, बेर, जंगली फल और जामुन जैसे उत्पादों के संग्रहण के साथ उनके प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन की प्रभावी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया।

विदेश व्यापार महानिदेशालय के प्रतिनिधि देव कुमार ने बताया कि जिले के लिए जिला निर्यात कार्ययोजना पहले ही तैयार की जा चुकी है।

बैठक में सहायक निदेशक, विदेश व्यापार महानिदेशालय द्वारा निर्धारित प्रारूप के अनुरूप आवश्यक संशोधन करते हुए कार्ययोजना को दोबारा समिति के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।

उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि जिले में प्राकृतिक और स्थानीय संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता है। आवश्यकता इन उत्पादों की पहचान कर उनका मूल्यवर्धन, प्रसंस्करण और गुणवत्तापूर्ण पैकेजिंग सुनिश्चित करने की है।

इससे किसानों, स्थानीय उत्पादकों, स्वयं सहायता समूहों और उद्यमियों को बड़े बाजार से जोड़ने के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

बैठक में कृषि और बागवानी उत्पादों के संरक्षण के लिए जिले में 20 मिनी कोल्ड स्टोरेज स्थापित करने की दिशा में पहल करने का निर्देश दिया गया। इसके अलावा मशरूम उत्पादन और मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने तथा इनके उत्पादों को बाजार से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।

उपायुक्त ने आगामी बैठकों में झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन समिति को भी शामिल करने का निर्देश दिया।

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