पलामू

पलामू: लोकसभा में उठा चियांकी हवाई अड्डे का मुद्दा, सांसद बीडी राम ने की नियमित उड़ान सेवा शुरू करने की मांग

पलामू (झारखंड)। पलामू प्रमंडलीय मुख्यालय मेदिनीनगर स्थित चियांकी हवाई अड्डे के विकास और वहां से जल्द से जल्द नियमित वाणिज्यिक (Commercial) उड़ान सेवा शुरू करने की मांग संसद में गूंजी। पलामू के सांसद विष्णु दयाल (बीडी) राम ने मंगलवार को लोकसभा में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाते हुए केंद्र सरकार से लंबित विकास कार्यों को मिशन मोड में पूरा कराने का आग्रह किया।

50 लाख की आबादी दूरस्थ हवाई अड्डों पर निर्भर

सदन को संबोधित करते हुए सांसद बीडी राम ने कहा कि केंद्र सरकार की संशोधित ‘उड़ान’ (UDAN) योजना के तहत चियांकी हवाई अड्डे का चयन किया गया था, लेकिन इसके बावजूद अब तक यहाँ से उड़ानें शुरू नहीं हो सकी हैं।

उन्होंने बताया कि पलामू प्रमंडल के तीन जिलों—पलामू, गढ़वा और लातेहार की करीब 50 लाख से अधिक आबादी को हवाई यात्रा के लिए रांची, गयाजी या वाराणसी जैसे दूरदराज के हवाई अड्डों पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे आम जनता, मरीजों, व्यापारियों और अधिकारियों को भारी समय और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी गति

सांसद ने चियांकी हवाई अड्डे को उत्तर-पश्चिम झारखंड के आर्थिक विकास की कुंजी बताते हुए इसके मुख्य फायदों को रेखांकित किया:

  • पर्यटन में बढ़ोतरी: बेतला राष्ट्रीय उद्यान, पलामू टाइगर रिजर्व, ऐतिहासिक पलामू किला और नेतरहाट जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों की पहुँच आसान होगी।
  • व्यापार और उद्योग: कृषि, तसर रेशम, लाख और वनोपज से जुड़े स्थानीय लघु उद्योगों को बड़े बाजारों तक सीधी पहुँच मिलेगी।
  • आपातकालीन सेवाएं: स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार, एयर एम्बुलेंस सेवा और आपदा प्रबंधन के लिए यह हवाई अड्डा अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा।

सांसद ने रखीं ये प्रमुख मांगे

विष्णु दयाल राम ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय से बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता देने का अनुरोध करते हुए निम्नलिखित बिंदु सामने रखे:

  1. इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार: रनवे का विस्तार, आधुनिक टर्मिनल भवन, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) टावर, सुरक्षा अवसंरचना और अग्निशमन सुविधाओं के कार्य जल्द पूरे किए जाएं।
  2. बेहतर समन्वय: भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI), झारखंड सरकार और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच प्रभावी तालमेल बिठाकर लंबित स्वीकृतियां समयबद्ध तरीके से हासिल की जाएं।
  3. मासिक समीक्षा समिति: परियोजना की प्रगति पर नज़र रखने के लिए एक उच्चस्तरीय निगरानी समिति का गठन किया जाए, जो हर महीने समीक्षा करे।

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