रांची

बिजली उपभोक्ताओं को 5,000 करोड़ लौटाने का आदेश, वितरण कंपनियां हाईकोर्ट जाने की तैयारी में

बिजली

रांची : झारखंड में बिजली वितरण कंपनियों के सामने बड़ा वित्तीय संकट खड़ा हो गया है। झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा उपभोक्ताओं से वसूले गए करीब 5,000 करोड़ रुपये वापस करने का आदेश दिया है। इस राशि में अकेले सरायकेला-खरसावां जिले के उपभोक्ताओं से वसूले गए लगभग 166 करोड़ रुपये भी शामिल हैं। अब राज्य में बिजली आपूर्ति करने वाली कंपनियां इस आदेश के खिलाफ कानूनी विकल्प तलाश रही हैं।

2021 में लगाया गया था अतिरिक्त विद्युत शुल्क

झारखंड सरकार ने वर्ष 2021 में गजट अधिसूचना जारी कर बिजली उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त विद्युत शुल्क लागू किया था। इसके तहत घरेलू उपभोक्ताओं से 6 प्रतिशत, 10 एमवीए तक के औद्योगिक हाईटेंशन उपभोक्ताओं से 8 प्रतिशत और 10 एमवीए से अधिक क्षमता वाले उपभोक्ताओं से 15 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क वसूला गया था।
बिजली वितरण कंपनियों का कहना है कि यह राशि उन्होंने सरकार के निर्देशानुसार उपभोक्ताओं से लेकर सीधे सरकारी खाते में जमा कर दी थी।

हाईकोर्ट ने संशोधन को असंवैधानिक बताया

झारखंड सरकार ने जुलाई 2021 में झारखंड विद्युत शुल्क अधिनियम, 1948 में संशोधन कर नेट चार्जेस (बिजली बिल की कुल राशि) पर प्रतिशत के आधार पर शुल्क वसूली का प्रावधान किया था। लेकिन झारखंड हाई कोर्ट ने 5 जनवरी 2026 को इस संशोधन को असंवैधानिक करार देते हुए इस तरह की वसूली को रद्द कर दिया। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि उपभोक्ताओं से वसूली गई राशि उन्हें ब्याज सहित लौटाई जाए या उनके बिजली बिल में समायोजित की जाए।

कंपनियों के सामने खड़ा हुआ वित्तीय संकट

बिजली वितरण कंपनियों का कहना है कि उनकी कुल आय का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा बिजली खरीद में ही खर्च हो जाता है। ऐसे में एकमुश्त 5,000 करोड़ रुपये लौटाना उनके लिए बेहद मुश्किल है, खासकर जब यह राशि पहले ही सरकार को जमा की जा चुकी है।

कंपनियां लेंगी कानूनी सहारा

राज्य में बिजली आपूर्ति करने वाली प्रमुख कंपनियां—टाटा स्टील, टाटा स्टील यूएसआइएल, झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड, सेल बोकारो और दामोदर घाटी निगम—अब इस आदेश को लेकर कानूनी सलाह ले रही हैं और हाईकोर्ट में अपनी स्थिति स्पष्ट करने की तैयारी कर रही हैं।

उपभोक्ताओं और कंपनियों के बीच असमंजस की स्थिति

इस फैसले के बाद उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना बनी है, लेकिन कंपनियों के सामने भुगतान की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती है। उद्योग और घरेलू उपभोक्ता दोनों ही इस फैसले के प्रभाव को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में अदालत और सरकार की भूमिका अहम रहने वाली है।

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