पिठौरिया में “त्रिमूर्ति शिव जयंती महोत्सव 2026” के दूसरे दिन 12 ज्योतिर्लिंग मेला सह शिव कथा, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजा परिसर, भव्य झांकियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मोहा मन
कांके/पिठौरिया (रांची), 14 फरवरी 2026। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय कांके पिठौरिया (बड़ू) के तत्वावधान में आयोजित “त्रिमूर्ति शिव जयंती महोत्सव 2026” के दूसरे दिन दो दिवसीय 12 ज्योतिर्लिंग मेला सह शिव कथा का भव्य आयोजन किया गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और पूरा परिसर “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा।
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था की संचालिका बीके राजमती बहन, वीणा बहन और संगीता बहन ने संयुक्त रूप से शिव ध्वज फहराकर किया। विशिष्ट अतिथियों में रिलेशंस के निदेशक आशुतोष द्विवेदी, समाजसेवी संपत्ति देवी, चंद्रकांता खलखो, नारायण भाई, राम नाथ भाई सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
12 ज्योतिर्लिंगों की आकर्षक झांकियां बनीं केंद्र बिंदु
मेले में 12 ज्योतिर्लिंगों के भव्य प्रारूपों की मनोहारी झांकियां सजाई गईं। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया। शिव परिवार, कैलाश पर्वत एवं हिमालय स्थित पवित्र धामों की झांकियों ने लोगों का मन मोह लिया।
श्रद्धालुओं का कहना था कि ऐसे आयोजन गांव में धार्मिक चेतना के साथ-साथ एकता और भाईचारे की भावना को भी मजबूत करते हैं।
शिव कथा में आध्यात्मिक संदेश
शिव कथा के दौरान बीके राजमती बहन ने भगवान शिव के निराकार, ज्योति स्वरूप का वर्णन करते हुए कहा कि शिव परमात्मा शांति, पवित्रता और शक्ति के सागर हैं। उनके स्मरण मात्र से नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
उन्होंने 12 ज्योतिर्लिंगों की आध्यात्मिक महत्ता बताते हुए कहा कि ये केवल तीर्थ स्थल नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आत्मजागृति के प्रतीक हैं। कथा में शिव के त्याग, तपस्या, करुणा और विश्व कल्याण के संदेश को सरल शब्दों में प्रस्तुत किया गया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
स्थानीय बच्चों और युवाओं ने शिव भक्ति गीत, नृत्य एवं नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से भगवान भोलेनाथ की महिमा का जीवंत चित्रण किया। भक्ति संगीत से वातावरण भक्तिमय हो गया और श्रद्धालु झूम उठे।
महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। अंत में सभी श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से 12 ज्योतिर्लिंगों की महाआरती में भाग लिया और प्रसाद ग्रहण किया। दीप, धूप और मंत्रोच्चार से पूरा परिसर आलोकित हो उठा।
इस अवसर पर अशोक उरांव, उर्मिला देवी, लीला देवी, सुनीता देवी, पार्वती देवी, लखन उरांव, सुशील गाड़ी समेत कई गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
आयोजन समिति के अनुसार, महोत्सव का उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक मूल्यों का प्रसार और सकारात्मक जीवनशैली को बढ़ावा देना है। पिठौरिया क्षेत्र के लिए यह आयोजन श्रद्धा, भक्ति और संस्कृति का अद्भुत संगम बनकर यादगार आध्यात्मिक पर्व के रूप में स्थापित हो गया।
