स्कूली बसों में सुरक्षा की अनदेखी से बच्चों पर मंडरा रहा खतरा – हालिया घटनाओं के बाद झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन का कड़ा रुख
रांची : जिले में लगातार सामने आ रही आपराधिक घटनाओं, विशेषकर नाबालिग बच्चियों के साथ दुष्कर्म जैसी जघन्य वारदातों ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। इन घटनाओं के बीच स्कूली बसों एवं वैन में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि हाल ही में सामने आए मामलों में एक आरोपी का स्कूल वैन चालक होना अत्यंत चिंताजनक है। यह न केवल कानून-व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है, बल्कि स्कूल परिवहन व्यवस्था में गंभीर लापरवाही को भी उजागर करता है।
उन्होंने बताया कि चार दिन पूर्व ही झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन की ओर से उपायुक्त, रांची को ज्ञापन सौंपकर स्कूल बस एवं वैन चालकों के अनिवार्य पुलिस वेरिफिकेशन तथा सुरक्षा मानकों की सख्त जांच की मांग की गई थी। इसके बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होना चिंता का विषय है।
अजय राय ने कहा कि वर्तमान में अधिकांश स्कूली बसें केवल ड्राइवर एवं खलासी के भरोसे संचालित हो रही हैं, जबकि कई वैन सिर्फ चालक के सहारे चल रही हैं। यह स्थिति बच्चों की सुरक्षा के साथ सीधा समझौता है और किसी भी समय बड़ी घटना को जन्म दे सकती है।
उन्होंने आगे कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं परिवहन विभाग के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक स्कूली वाहन में एक जिम्मेदार शिक्षक/शिक्षिका या अधिकृत स्टाफ की उपस्थिति अनिवार्य है, लेकिन जमीनी स्तर पर इन नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
इन घटनाओं के बाद अभिभावकों में गहरा आक्रोश और भय का माहौल है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसी घटनाएं भविष्य में और बढ़ सकती हैं।
झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन की प्रमुख मांगें:
• सभी स्कूल बसों एवं वैन चालकों का अनिवार्य पुलिस वेरिफिकेशन एवं बैकग्राउंड जांच तुरंत सुनिश्चित की जाए।
• प्रत्येक स्कूली वाहन में शिक्षक/शिक्षिका या अधिकृत स्टाफ की अनिवार्य तैनाती की जाए।
• बिना सहायक स्टाफ के संचालित वाहनों के विरुद्ध सख्त जांच एवं कार्रवाई की जाए।
• परिवहन एवं शिक्षा विभाग द्वारा संयुक्त विशेष अभियान चलाकर सभी स्कूल वाहनों की जांच की जाए।
• बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाकर त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जाए।
अजय राय ने स्पष्ट कहा कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिला प्रशासन को इस संवेदनशील विषय पर तुरंत हस्तक्षेप करते हुए ठोस एवं प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि अभिभावकों का विश्वास बहाल हो सके।
