फर्जी प्रमाणपत्र से मेडिकल दाखिले की होगी जांच, सभी सरकारी-निजी कॉलेज आएंगे दायरे में
रांची, संवाददाता: झारखंड के मेडिकल कॉलेजों में नामांकन के दौरान फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की शिकायतों को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में चल रही सीआईडी जांच अब केवल रिम्स तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि राज्य के सभी सरकारी एवं निजी मेडिकल कॉलेजों में हुए दाखिलों की भी जांच की जाएगी।
फर्जी दस्तावेजों की शिकायत पर कार्रवाई
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि यूजी एवं पीजी मेडिकल पाठ्यक्रमों में नामांकन के दौरान कुछ अभ्यर्थियों द्वारा फर्जी जाति प्रमाण पत्र तथा स्थायी निवासी प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए जाने की शिकायतें मिली थीं। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच और सच्चाई सामने लाने के लिए सरकार ने व्यापक जांच के निर्देश दिए हैं।
पारदर्शी जांच के लिए बनी समिति
मामले की गहन पड़ताल के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है। यह समिति सभी संबंधित दस्तावेजों और नामांकन प्रक्रिया की विस्तार से समीक्षा करेगी तथा अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
रिपोर्ट के आधार पर होगी कार्रवाई
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद दोषी पाए जाने वाले अभ्यर्थियों या संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि मेडिकल शिक्षा संस्थानों में नामांकन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।
योग्य अभ्यर्थियों के अधिकारों की रक्षा पर जोर
सरकार का मानना है कि फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर प्रवेश लेने वालों के कारण वास्तविक और पात्र अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित होते हैं। ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए जांच प्रक्रिया को गंभीरता से आगे बढ़ाया जा रहा है।
