रांची

रांची के डोरंडा में कलाकृति हाट की शुरुआत, झारखंड की लोककला और हस्तशिल्प को मिलेगा नया मंच

रांची, 29 अक्टूबर। झारखंड की समृद्ध लोककला, जनजातीय कला और पारंपरिक हस्तशिल्प को बढ़ावा देने की दिशा में रांची में नई पहल शुरू की गई है। डोरंडा स्थित महावीर कॉम्प्लेक्स में कलाकृति हाट की शुरुआत की जा रही है। काली मंदिर रोड स्थित कॉम्प्लेक्स के प्रथम तल पर शुरू किए गए इस हाट का उद्देश्य स्थानीय कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने और उसे लोगों तक पहुंचाने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराना है।

इस अवसर पर भारत सरकार के रक्षा राज्य मंत्री और रांची के सांसद संजय सेठ की उपस्थिति रहेगी। कलाकृति हाट के माध्यम से झारखंड की पारंपरिक कला को व्यापक पहचान दिलाने के साथ कलाकारों की आजीविका और उनके हुनर को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है।

सोहराय से जादोपटिया तक दिखेगी झारखंड की कला

कलाकृति हाट में झारखंड की कई पारंपरिक कलाओं और हस्तशिल्प को प्रदर्शित किया जा रहा है। इनमें सोहराय, जादोपटिया, पैतकर और कोहबर जैसी लोक एवं जनजातीय कलाएं प्रमुख हैं। इसके अलावा मधुबनी और मिथिला कला से जुड़ी कलाकृतियां भी यहां देखने को मिलेंगी।

इन कलाओं के माध्यम से झारखंड की संस्कृति, लोकजीवन और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को लोगों के सामने प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। यहां आने वाले कला प्रेमी न केवल कलाकृतियां देख सकेंगे, बल्कि उनके बारे में जानकारी हासिल करने के साथ अपनी पसंद की कलाकृतियां खरीद भी सकेंगे।

कलाकारों को उनकी मेहनत का उचित सम्मान दिलाने की पहल

प्रसिद्ध कलाकार धनंजय कुमार के अनुसार, कलाकृति हाट का उद्देश्य कला को आम लोगों तक पहुंचाने के साथ उन कलाकारों को सम्मान और पहचान दिलाना भी है, जो वर्षों से पारंपरिक कलाओं को जीवित रखने में योगदान दे रहे हैं।

इस पहल से लोगों और कलाकारों के बीच सीधा जुड़ाव बढ़ने की उम्मीद है। लोग कलाकारों की बनाई कलाकृतियों को करीब से समझ सकेंगे और उन्हें खरीदकर कलाकारों को आर्थिक रूप से सहयोग भी कर सकेंगे।

वंचित समुदाय की बच्चियों को कला का प्रशिक्षण

कलाकृति हाट की खास पहल में वंचित समुदायों की प्रतिभाशाली बच्चियों को कला प्रशिक्षण देना भी शामिल है। ये बच्चियां अपने हाथों से विभिन्न कलाकृतियां तैयार कर रही हैं।

प्रसिद्ध कलाकार धनंजय कुमार के मार्गदर्शन में उन्हें कला की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। यह पहल कलाकृति स्कूल ऑफ आर्ट्स से भी जुड़ी है। इसका उद्देश्य बच्चियों की रचनात्मक प्रतिभा को निखारने के साथ उन्हें अपने हुनर के जरिए आगे बढ़ने का अवसर देना है।

कलाकृतियों की बिक्री से कलाकारों को मिलेगा आर्थिक सहयोग

कलाकृति हाट का मकसद केवल कला की प्रदर्शनी या बिक्री तक सीमित नहीं है। इसके जरिए स्थानीय कलाकारों को उनकी कला का बाजार उपलब्ध कराने और उनकी आय के अवसर बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

यहां से कलाकृतियां खरीदने वाले लोगों को एक ओर पारंपरिक और स्थानीय कला को अपने घर तक ले जाने का अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी ओर उनकी खरीदारी से कलाकारों को सीधे आर्थिक प्रोत्साहन मिलेगा।

नई पीढ़ी को झारखंड की संस्कृति से जोड़ने की कोशिश

झारखंड की लोक और जनजातीय कलाएं राज्य की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा हैं। बदलते समय में इन पारंपरिक कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और कलाकारों को उचित मंच देना बड़ी चुनौती है।

कलाकृति हाट इसी दिशा में एक प्रयास है। इसके जरिए स्थानीय कलाकारों, युवाओं और कला प्रेमियों को एक मंच पर लाने की कोशिश की जा रही है। उम्मीद है कि इस पहल से झारखंड की पारंपरिक कलाओं को नया बाजार और कलाकारों को नई पहचान मिलेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *