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राज्यसभा सीटों को लेकर गठबंधन में खींचतान, झामुमो ने दिखाए तेवर

Ranchi : झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। चुनाव की तारीख नजदीक आते ही महागठबंधन के भीतर भी खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। कांग्रेस द्वारा बोकारो के प्रणव झा को उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने साफ कर दिया है कि वह दोनों सीटों पर अपना दावा छोड़ने के मूड में नहीं है। इसके बाद गठबंधन की एकजुटता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस ने गुरुवार देर रात राज्यसभा चुनाव के लिए बोकारो निवासी प्रणव झा के नाम की घोषणा की। जैसे ही यह घोषणा हुई, राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। विपक्षी दलों के साथ-साथ कांग्रेस के अंदर भी इस फैसले को लेकर सवाल उठने लगे। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि प्रणव झा लंबे समय से झारखंड की सक्रिय राजनीति में दिखाई नहीं दिए हैं। इसी वजह से उन्हें “पैराशूट उम्मीदवार” कहा जा रहा है। माना जा रहा है कि उनके नाम पर अंतिम फैसला कांग्रेस आलाकमान ने लिया है, जिससे प्रदेश स्तर के कई नेताओं में नाराजगी है।

फुरकान अंसारी की नाराजगी आई सामने

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और गोड्डा के पूर्व सांसद फुरकान अंसारी ने भी सोशल मीडिया के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि वर्षों तक पार्टी के लिए काम करने वाले नेताओं की अनदेखी की जा रही है। उनकी इस प्रतिक्रिया के बाद यह चर्चा और तेज हो गई कि कांग्रेस के भीतर उम्मीदवार चयन को लेकर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह असंतोष बढ़ा तो इसका असर पार्टी की रणनीति पर भी पड़ सकता है।

मुख्यमंत्री आवास पर हुई झामुमो की अहम बैठक

कांग्रेस के उम्मीदवार घोषित होने के बाद शुक्रवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास पर झामुमो की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में पार्टी के मंत्री, विधायक, सांसद और वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बैठक का मुख्य मुद्दा राज्यसभा चुनाव और पार्टी की रणनीति तय करना था। बैठक के बाद नेताओं ने साफ संकेत दिया कि झामुमो दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारना चाहता है।

हफीजुल हसन बोले- दोनों सीटों पर हमारा दावा

बैठक के बाद मंत्री हफीजुल हसन ने कहा कि झामुमो राज्य की सबसे बड़ी पार्टी है और इसलिए दोनों सीटों पर उसका दावा बनता है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन का अधिकार केंद्रीय अध्यक्ष को दे दिया है। कांग्रेस के उम्मीदवार घोषित किए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह बाद की बात है, लेकिन झामुमो का रुख पहले से स्पष्ट है और पार्टी दोनों सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। उनके बयान को राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे साफ संकेत मिलता है कि झामुमो अपने स्टैंड से पीछे हटने को तैयार नहीं है।

बैद्यनाथ राम ने भी दोहराया पार्टी का रुख

झामुमो विधायक बैद्यनाथ राम ने भी बैठक के बाद कहा कि सभी सांसदों, विधायकों और मंत्रियों की राय है कि दोनों सीटों पर झामुमो के उम्मीदवार चुनाव लड़ें। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सहमति लिए बिना उम्मीदवार की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि पार्टी के नेताओं ने अपनी भावना मुख्यमंत्री तक पहुंचा दी है और अंतिम निर्णय लेने का अधिकार भी उन्हें सौंप दिया गया है।

महागठबंधन की एकजुटता पर उठे सवाल

झामुमो के इस रुख के बाद महागठबंधन की एकता पर सवाल खड़े होने लगे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर कांग्रेस और झामुमो दोनों अलग-अलग उम्मीदवार उतारते हैं तो यह गठबंधन के भीतर बढ़ती दूरी का संकेत होगा। राज्यसभा चुनाव आमतौर पर संख्या बल और रणनीति का खेल माना जाता है। ऐसे में उम्मीदवारों को लेकर पैदा हुआ विवाद आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

अब हेमंत सोरेन के फैसले पर टिकी हैं निगाहें

फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों और आम लोगों की नजर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अगले कदम पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि कांग्रेस और झामुमो आपसी सहमति से कोई रास्ता निकालते हैं या फिर दोनों दल अपनी-अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने के लिए अलग-अलग दावेदारी पेश करते हैं। इतना तय है कि राज्यसभा चुनाव ने झारखंड की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और इसके असर की गूंज आने वाले दिनों में भी सुनाई देती रहेगी।

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