Jharkhand Health News: नई बीमा कंपनी के चयन के लिए जल्द निकलेगा टेंडर, आशा-आंगनबाड़ी कर्मियों को भी आयुष्मान से जोड़ने की तैयारी
रांची: स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में मंगलवार को झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी की बैठक हुई। बैठक में आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना, मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना और राज्य कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा योजना (SEHIS) की समीक्षा की गई।
बैठक में मौजूदा बीमा योजना की अवधि समाप्त होने को देखते हुए नई बीमा कंपनी के चयन के लिए जल्द टेंडर जारी करने का फैसला लिया गया। आरोग्य सोसाइटी को निर्देश दिया गया कि इस महीने के अंत तक पिछले वर्षों में योजना के तहत जोड़ी गई नई सुविधाओं को शामिल करते हुए प्रस्ताव तैयार किया जाए।
लंबित इलाज के दावों का जल्द होगा निपटारा
बैठक में बीमा कंपनियों के पास लंबित इलाज संबंधी दावों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द निपटाने का निर्देश दिया गया। अधिकारियों को कहा गया कि मरीजों और अस्पतालों से जुड़े भुगतान में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
टीएमएस 1.0 और 2.0 में भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद तकनीकी कारणों से कुछ अस्पतालों को राशि नहीं मिल पाने के मामलों की भी समीक्षा की गई। ऐसे मामलों को बैंक, बीमा कंपनी और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) की टीम के साथ समन्वय कर जल्द सुलझाने का निर्देश दिया गया।
दावों की बढ़ती संख्या को देखते हुए आरोग्य सोसाइटी में खाली पदों को भरने पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा डॉक्टरों और डेटा एनालिस्ट की नियुक्ति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
आशा और आंगनबाड़ी कर्मियों को आयुष्मान से जोड़ने पर जोर
बैठक में आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका और उनके परिवारों को आयुष्मान योजना से जोड़ने की प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि जो पात्र लाभुक अभी तक आयुष्मान कार्ड से वंचित हैं, उनका ई-केवाईसी पूरा कराकर कार्ड जारी कराया जाए। इसके लिए कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) और अस्पतालों के माध्यम से कार्ड बनाने की प्रक्रिया को तेज करने को कहा गया।
साथ ही, लाभुकों तक योजना का लाभ पहुंचाने के लिए पीडीएस डीलरों और सीएससी केंद्रों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया गया।
स्वास्थ्य योजनाओं की निगरानी पर जोर
बैठक में राज्य की स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, लंबित दावों के त्वरित भुगतान और पात्र लाभुकों को योजनाओं से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि योजनाओं का लाभ जरूरतमंद लोगों तक समय पर पहुंचे और तकनीकी अथवा प्रशासनिक कारणों से इलाज एवं भुगतान में अनावश्यक बाधा न आए।
