रांची

झारखंड विधानसभा : विधायक सरयू राय ने मानगो पेयजल परियोजना में देरी का मुद्दा उठाया

रांची, 17 मार्च । झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 16वें दिन मंगलवार को सदन की कार्रवाई पूर्वाह्न 11.05 बजे शुरू हुई। सदन में विधायक सरयू राय ने मानगो पेयजल परियोजना में देरी का मुद्दा उठाया। विधायक सरयू राय ने सवाल किया कि वर्ष 2009 में शुरू हुई यह योजना आज तक पूरी नहीं हो सकी।

विधायक ने आरोप लगाया कि 2019 से 2024 के बीच परियोजना की उपेक्षा हुई,जलमीनारें अधूरी रहीं,इंटेक वेल में जमी बालू की सफाई नहीं हुई और पुराने मोटर बदलने में भी लापरवाही बरती गई,जिससे जलापूर्ति प्रभावित हुई। राय ने यह भी कहा कि योजना पर्याप्त पानी देने में सक्षम नहीं है, फिर भी प्रतिदिन टैंकरों से एमजीएम अस्पताल को पानी भेजा जा रहा है।

जवाब में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि केंद्र सरकार से एनओसी मिलने में देरी के कारण परियोजना प्रभावित हुई। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मार्च 2026 तक योजना पूरी कर दी जाएगी। साथ ही उन्होंने बताया कि एमजीएम अस्पताल को रोजाना 72 हजार लीटर पानी दिया जा रहा है और योजना के फेज-2 का निर्माण जरूरी है।

विधायक सरयू राय ने सदन में कोडरमा डोमचांच को नगर पंचायत घोषित करने की अधिसूचना को रद्द करने की मांग की। इस पर मंत्री सुदिव्य ने कहा जनगणना की रिपोर्ट आने के बाद ही सरकार पुनः विचार करेगी।विधायक ने पथ निर्माण विभाग में एई के पदस्थापन,सेवा विनियमन और वेतन भुगतान का मुद्दा उठाया।

सदन में विधायक आलोक कुमार चौरसिया ने पथ निर्माण विभाग में सहायक अभियंताओं के पदस्थापन, सेवा विनियमन और वेतन भुगतान का मुद्दा उठाया। विधायक आलोक कुमार चौरसिया ने मंत्री से चार बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी मांगी।

विधायक ने पूछा कि क्या वित्त विभाग के 20 मई 2022 के संकल्प संख्या 1337 के अनुसार पदस्थापन की प्रतीक्षा अथवा प्रभार रहित अवधि को प्रशासी विभाग बिना वित्त विभाग की सहमति के स्वयं विनियमित कर सकता है। साथ ही उन्होंने 2007 बैच के सहायक अभियंताओं को नियुक्ति से पदभार ग्रहण तक की अवधि को अनिवार्य प्रतीक्षा मानते हुए वेतन भुगतान किए जाने का भी उल्लेख किया।

सदन में यह भी सवाल उठा कि वर्ष 2022 में नियुक्त सहायक अभियंता (पथ निर्माण) को नियुक्ति से पदभार ग्रहण तक की अवधि के लिए वेतन भुगतान क्यों नहीं किया गया। जबकि पूर्व में विभाग की ओर से ऐसी व्यवस्था अपनाई जा चुकी है।

इस मामले के जवाब में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि यह पूरा मामला फिलहाल प्रक्रियाधीन है। उन्होंने संकेत दिया कि विभाग इस विषय की समीक्षा कर रहा है और नियमानुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी।

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