Home

गिरिडीह के मोतीलेदा में महिला कृषकों ने बदली खेती की तस्वीर, गाजर बनी आत्मनिर्भरता का सहारा

Giridih : गिरिडीह जिले के बेंगाबाद प्रखंड स्थित मोतीलेदा पंचायत में महिला कृषकों ने गाजर की खेती से एक नई मिसाल पेश की है। पहले बंजर पड़ी जमीन आज महिलाओं की मेहनत और आधुनिक तकनीक से हरी-भरी हो गई है। गाजर की खेती अब यहां महिलाओं की आय का मुख्य जरिया बन रही है।

मोतीलेदा पंचायत में पहली बार बड़े पैमाने पर गाजर की खेती की जा रही है। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी करीब 20 से 25 महिलाएं मिलकर 4 से 5 एकड़ भूमि पर गाजर उगा रही हैं। यह खेती वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीके से की जा रही है, जिसे स्थानीय लोग “पंजाब की तर्ज पर खेती” कह रहे हैं।

महिला कृषकों ने बताया कि बेंगाबाद जेएसएलपीएस और झारखंड सरकार से मिले प्रशिक्षण के बाद खेती का तरीका बदला गया। अब कियारी और बेड बनाकर जैविक विधि से गाजर की खेती हो रही है। रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल कम किया गया है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बेहतर हुए हैं।

एसएचजी से जुड़ी महिलाएं आशा वर्मा, कविता कुमारी, लक्ष्मी कुमारी, बिनती देवी और सुनीता देवी ने बताया कि वे गाजर के साथ मटर, गोभी और अन्य सब्जियों की भी खेती करती हैं। नई तकनीक अपनाने से पैदावार में कई गुना बढ़ोतरी हुई है।

महिलाओं के अनुसार, 10 डिसमिल जमीन से 6 से 7 क्विंटल गाजर का उत्पादन हो रहा है, जिससे 15 से 20 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है। वहीं किसान कोलेश्वर वर्मा और बिनोद वर्मा ने बताया कि प्रति एकड़ लगभग 65 क्विंटल उत्पादन हो रहा है और एक एकड़ से करीब 2 लाख रुपये तक की आय संभव है। खेती की लागत 20 से 25 हजार रुपये के बीच रहती है।

हालांकि, सिंचाई और बिजली की कमी अब भी एक बड़ी समस्या है। खेतों तक बिजली नहीं पहुंचने के कारण डीजल पंप से सिंचाई करनी पड़ती है, जिससे लागत बढ़ जाती है। महिलाओं का कहना है कि अगर बिजली की सुविधा मिल जाए तो मुनाफा और बढ़ सकता है।

इसके बावजूद मोतीलेदा की महिला कृषक उत्साह से भरी हैं। उनका कहना है कि प्रशिक्षण और मेहनत ने उनकी जिंदगी बदल दी है। गाजर की खेती अब उनके लिए आत्मनिर्भर बनने का मजबूत आधार बन रही है और आने वाले समय में यह पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *