भारत के पास कितनी रसोई गैस बची? रोज 75 लाख LPG सिलेंडर की बुकिंग, 50 लाख की डिलीवरी; सरकार ने उठाए कई कदम

नई दिल्ली: देश में रसोई गैस (LPG) की मांग अचानक बढ़ने से आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव देखने को मिल रहा है। हाल के दिनों में सिलेंडर बुकिंग में तेजी आई है, जिसके बाद सरकार और तेल कंपनियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल देश में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन बढ़ती मांग के कारण कुछ स्थानों पर डिलीवरी में देरी हो सकती है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पहले देश में प्रतिदिन औसतन 50 से 55 लाख LPG सिलेंडर की बुकिंग होती थी। लेकिन हाल के दिनों में यह संख्या बढ़कर करीब 75 लाख सिलेंडर प्रतिदिन तक पहुंच गई है। इसके मुकाबले तेल कंपनियां अभी भी लगभग 50 लाख सिलेंडर रोजाना डिलीवर कर रही हैं। अचानक बढ़ी बुकिंग के कारण सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संभावित ऊर्जा संकट की खबरों के बाद लोगों में चिंता बढ़ी है। इसी कारण कई उपभोक्ता जरूरत से पहले ही सिलेंडर बुक कर रहे हैं। सरकार ने इसे “पैनिक बुकिंग” बताया है और लोगों से अपील की है कि वे जरूरत के अनुसार ही गैस सिलेंडर बुक करें।
भारत में वर्तमान समय में लगभग 33 करोड़ से अधिक घरेलू LPG कनेक्शन हैं। उज्ज्वला योजना के बाद ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में गैस का उपयोग तेजी से बढ़ा है। ऐसे में गैस की नियमित आपूर्ति बनाए रखना सरकार के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।
स्थिति को सामान्य बनाए रखने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। तेल कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि घरेलू जरूरतों को पूरा किया जा सके। साथ ही घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए कई स्थानों पर कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति सीमित की गई है।
इसके अलावा जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए भी सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर कोई व्यक्ति या संस्था गैस सिलेंडर की जमाखोरी या अवैध बिक्री करती पाई जाती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जहां पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की सुविधा उपलब्ध है, वहां उपभोक्ताओं को धीरे-धीरे उसी की ओर शिफ्ट होने की सलाह दी जा रही है, ताकि एलपीजी पर दबाव कम हो सके।
आवश्यकता पड़ने पर भारत एलपीजी आयात भी बढ़ा सकता है। भारत अपनी कुल जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। सरकार ने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों से गैस आयात बढ़ाया जा सकता है।
सरकार और तेल कंपनियों का कहना है कि देश में रसोई गैस खत्म होने जैसी कोई स्थिति नहीं है। फिलहाल बढ़ती मांग के कारण आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव है, जिसे जल्द ही संतुलित कर लिया जाएगा। उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे घबराकर अतिरिक्त सिलेंडर बुक न करें, ताकि सभी लोगों को समय पर गैस उपलब्ध हो सके।

