फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती रद्द करने की अधिसूचना पर हाई कोर्ट की रोक
कोर्ट ने कहा- प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना नियमित नियुक्ति समाप्त नहीं की जा सकती
रांची, 9 सितंबर। झारखंड उच्च न्यायालय ने फूड सेफ्टी ऑफिसर की भर्ती प्रक्रिया रद्द करने संबंधी राज्य सरकार की अधिसूचना के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने कहा कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना नियमित नियुक्ति को बाधित या समाप्त नहीं किया जा सकता।
याचिकाकर्ता राधिका कुमारी एवं एक अन्य की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वात्स, कुमार अभिषेक और अर्पण एम. एक्का ने पक्ष रखा। याचिका में 18 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना संख्या 06/LO.S.A.-01-07/54042026 को चुनौती दी गई थी। इस अधिसूचना के माध्यम से विज्ञापन संख्या 18/2023 के तहत फूड सेफ्टी ऑफिसर की पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी गई थी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि वे उक्त विज्ञापन के तहत विधिवत नियुक्त हुए थे, लेकिन भर्ती प्रक्रिया रद्द किए जाने के बाद उनकी सेवाएं भी समाप्त कर दी गईं। कार्रवाई से पहले उन्हें सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया।
सरकार ने भर्ती में गड़बड़ी का दिया हवाला
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहिताश्य राय ने अदालत को बताया कि विभिन्न नागरिकों की ओर से भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं। मामले की विस्तृत जांच सीआईडी द्वारा की जा रही है और कुछ गिरफ्तारियां भी हुई हैं। सरकार ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के कारण विज्ञापन संख्या 18/2023 के तहत हुई नियुक्तियों को रद्द किया गया।
दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने प्रथम दृष्टया कहा कि नियमित नियुक्ति को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना समाप्त नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि अभी तक रिकॉर्ड पर ऐसी कोई सामग्री नहीं है, जिससे यह स्पष्ट हो कि कौन-कौन से अभ्यर्थी भ्रष्टाचार में शामिल हैं। वहीं, जांच एजेंसी पहले से ही मामले की जांच कर रही है।
प्रभावित कर्मियों को काम जारी रखने का निर्देश
अदालत ने कहा कि इस मामले में न्यायहित सर्वोपरि है। याचिकाकर्ताओं की सेवाएं बिना विधि सम्मत प्रक्रिया अपनाए समाप्त किए जाने के कारण 18 अगस्त की अधिसूचना के क्रियान्वयन पर रोक लगाना उचित है।
कोर्ट ने राज्य सरकार को मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। जवाब में सीआईडी जांच, अब तक हुई कार्रवाई और आगे की जांच की प्रगति का पूरा विवरण देने को कहा गया है।
महाधिवक्ता कार्यालय के माध्यम से संबंधित विभाग को निर्देश दिया गया कि याचिकाकर्ताओं के साथ-साथ अधिसूचना से प्रभावित समान स्थिति वाले अन्य नियुक्त कर्मियों को भी काम जारी रखने दिया जाए।
हालांकि, अदालत ने सभी याचिकाकर्ताओं को शपथपत्र/अंडरटेकिंग दाखिल करने का निर्देश दिया है कि संबंधित आपराधिक मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित अंतिम आदेश उनके लिए बाध्यकारी होगा। इसके आधार पर सरकार कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी।
मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
