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आधी या एक-तिहाई सजा काट चुके कैदियों की रिहाई पर हाईकोर्ट में सुनवाई, अगली तारीख 17 सितंबर

रांची, 30 जुलाई: राज्य की विभिन्न जेलों में बंद ऐसे कैदियों और विचाराधीन बंदियों (अंडर ट्रायल) की रिहाई से जुड़ी जनहित याचिका पर गुरुवार को झारखंड उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से सुझाए गए पांच प्रमुख बिंदुओं पर बहस हुई। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 सितंबर की तारीख निर्धारित की है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य की जेलों में कई ऐसे कैदी और अंडर ट्रायल बंदी हैं, जो लंबे समय से जेल में हैं, लेकिन वे एक बार भी जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सके। वहीं, कुछ बंदियों ने एक बार जमानत के लिए आवेदन किया, लेकिन बाद में दोबारा याचिका दाखिल नहीं कर पाए।

अदालत को यह भी बताया गया कि कई मामलों में आरोप पत्र दाखिल नहीं होने के बावजूद आरोपी डिफॉल्ट बेल का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। इसके अलावा यूएपीए, सीएलए और सीसीए जैसे गंभीर मामलों में आरोपितों को कानूनी सहायता और जमानत प्रक्रिया में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके कारण वे लंबे समय तक जेल में बंद रह रहे हैं। ट्रायल शुरू होने में देरी भी लंबे कारावास का एक प्रमुख कारण बताया गया।

राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता मो. शहाबुद्दीन ने अदालत को बताया कि ऐसे मामलों के लिए कानून में स्पष्ट प्रावधान हैं और सरकार कानूनी सीमाओं के भीतर रहकर आवश्यक कार्रवाई कर रही है।

मामले की सुनवाई एम.एस. सोनक और राजेश शंकर की खंडपीठ ने की।

गौरतलब है कि पिछली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत में एक रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें बताया गया था कि राज्य की जेलों में करीब 1,000 ऐसे कैदी हैं, जिन्होंने अपनी निर्धारित सजा का आधा या एक-तिहाई हिस्सा पूरा कर लिया है। यह जनहित याचिका स्टेन स्वामी एवं अन्य की ओर से दाखिल की गई थी।

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