पश्चिमी सिंहभूमि

हाथी के बढ़ते आतंक से दहशत, वन विभाग हाई अलर्ट पर

पश्चिमी सिंहभूम, 08 जनवरी । पश्चिमी सिंहभूम जिला इन दिनों एक भटके हुए दंतैल हाथी के आतंक से जूझ रहा है।

गोईलकेरा से लेकर टोंटो और नोवामुंडी के जंगली और ग्रामीण इलाकों तक इस हाथी ने जिस तरह लगातार हमले किए हैं, उससे पूरे कोल्हान क्षेत्र में दहशत का माहौल है। अब तक इस हाथी के हमलों में 20 लोगों की मौत की खबर सामने आ चुकी है। हाथी के असामान्य और अत्यंत आक्रामक व्यवहार को देखते हुए ग्रामीण इसे ‘आदमखोर’ हाथी कह रहे हैं।

स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए राज्य सरकार और वन विभाग ने जिले में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अभूतपूर्व कदम उठाए हैं और पूरा प्रशासन हाई अलर्ट पर है।

जानकारी के अनुसार यह दंतैल हाथी अपने झुंड से बिछड़ गया है और अत्यधिक उग्र अवस्था में है। वन विभाग के अनुभवी कर्मियों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी किसी हाथी को इतना प्रचंड और हिंसक नहीं देखा। प्रत्यक्षदर्शियों और तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार यह हाथी एक घटना को अंजाम देने के बाद बेहद तेजी से स्थान बदल रहा है और रात के दौरान 30 से 40 किलोमीटर तक का सफर कर ले रहा है, जिससे इसकी निगरानी और रोकथाम और भी चुनौतीपूर्ण हो गई है।

लगातार बढ़ते हमलों और जान-माल के नुकसान को देखते हुए वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव अबूबकर सिद्दीकी के निर्देश पर पश्चिमी सिंहभूम जिला और कोल्हान प्रमंडल में युद्ध स्तर पर कार्रवाई की जा रही है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आरसीसीएफ जमशेदपुर, सीएफ चाईबासा और सभी वन प्रमंडल पदाधिकारी जिला मुख्यालय में ही कैंप कर रहे हैं और पल-पल की स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। पूरे प्रभावित क्षेत्र में थर्मल ड्रोन कैमरों के जरिए हाथी की गतिविधियों की लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि उसके मूवमेंट का सटीक आकलन कर समय रहते कदम उठाए जा सकें।

हाथी के अचानक रिहायशी इलाकों में घुसने की आशंका को देखते हुए क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) को अलर्ट मोड में रखा गया है। ग्रामीण इलाकों में लगातार माइकिंग कर लोगों को सतर्क किया जा रहा है और हाथी प्रभावित क्षेत्रों में टॉर्च और पटाखों का वितरण किया गया है, ताकि हाथी के पास आने की स्थिति में लोग खुद को सुरक्षित रख सकें। वन विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर लोगों को हाथी से बचाव के उपाय भी समझा रही हैं।

दंतैल हाथी को सुरक्षित तरीके से काबू में करने और उसे आबादी से दूर स्थानांतरित करने के लिए 4 जनवरी से ही पश्चिम बंगाल के अनुभवी विशेषज्ञों की टीम चाईबासा में डटी हुई है। इसके अलावा समस्या पैदा कर रहे हाथी को ट्रेंकुलाइज कर सुरक्षित स्थान पर भेजने के लिए गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा से 6 जनवरी 2026 को औपचारिक बातचीत शुरू की गई है। वहीं ओडिशा के क्योंझर से मोबाइल वेटरनरी यूनिट की टीम बुधवार शाम चाईबासा पहुंच चुकी है, जो मौके पर चिकित्सकीय सहयोग दे रही है।

राष्ट्रीय स्तर पर भी विशेषज्ञों को जोड़ा गया है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया), देहरादून के विशेषज्ञों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है ताकि हाथी के व्यवहार का वैज्ञानिक विश्लेषण कर स्थायी समाधान निकाला जा सके। इसके साथ ही सीसीएफ वाइल्डलाइफ की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो मौके पर कैंप कर पूरी स्थिति की निगरानी और त्वरित निर्णय ले रही है। पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ स्वयं चाईबासा पहुंचकर हालात की समीक्षा कर रहे हैं।

गुरुवार को वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि हाथियों के हमले में घायल लोगों को अस्पताल में भर्ती कराकर बेहतर इलाज की व्यवस्था की गई है और मृतकों के परिजनों को नियमानुसार अनुग्रह राशि और मुआवजा देने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से जंगल या सुनसान इलाकों में न जाएं, रात के समय अतिरिक्त सतर्कता बरतें और वन विभाग व जिला प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का सख्ती से पालन करें, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके।

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