झारखंड में पहली बार पूरा थाना लाइन हाजिर, बोकारो एसपी ने की कार्रवाई

Bokaro : बोकारो से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां अपहरण के एक पुराने मामले की जांच में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। SP कार्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र में दर्ज अपहरण कांड की जांच सही तरीके से नहीं की गई थी। यह मामला 24 जुलाई 2025 का है, जब एक 18 वर्षीय युवती के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई गई थी।
SIT जांच में सामने आई सच्चाई
मामले की जांच के लिए गठित SIT टीम ने जब केस की पड़ताल की, तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। जांच में पाया गया कि पुलिस अधिकारियों ने सही तरीके से अनुसंधान नहीं किया और कुछ स्तर पर आरोपियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश भी हुई। इससे केस कमजोर हो गया और पूरे मामले में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए।
एक दिन में केस का खुलासा, आरोपी गिरफ्तार
जांच में तेजी लाते हुए नई टीम का गठन किया गया। इस टीम ने महज एक दिन के अंदर केस का खुलासा कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी की निशानदेही पर अपहृत युवती से जुड़े अहम सबूत भी बरामद किए गए, जिससे पूरे मामले की तस्वीर साफ हो गई।
थाना के पूरे स्टाफ पर गिरी गाज
इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए पिंड्राजोरा थाना में तैनात पुलिसकर्मियों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। थाने के पदस्थापित अधिकारियों और कर्मचारियों पर सहयोग नहीं करने और जानकारी छुपाने के आरोप लगे हैं। इसके बाद एएसआई से लेकर थाना प्रभारी स्तर तक के कुल 28 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
किस पद के कितने लोग सस्पेंड
कार्रवाई के तहत कुल 28 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया है, जिसमें 10 एसआई, 5 एएसआई, 2 हवलदार और 11 सिपाही शामिल हैं। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि कुछ पुलिसकर्मियों ने आरोपी को बचाने के लिए पैसे के लेन-देन और मिलीभगत जैसे काम किए। यही वजह है कि पूरे मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए सभी दोषियों को सस्पेंड कर दिया गया।
पुलिस की छवि सुधारने की कोशिश
इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमा साफ संदेश देना चाहता है कि लापरवाही या भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों पर आगे भी विभागीय कार्रवाई जारी रहेगी।
