बीआईटी मेसरा में हरित ऊर्जा और डिजिटल प्रौद्योगिकियों पर पांच दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम 18 मई से
ज्यूरिख, सिंगापुर और कैलिफ़ोर्निया सहित कई देशों के प्रतिभागी होंगे शामिल
रांची, 15 मई 2026 : के इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग द्वारा 18 से 22 मई 2026 तक “सस्टेनेबल हरित ऊर्जा सिस्टम्स के लिए उभरती नियंत्रण एवं डिजिटल प्रौद्योगिकियां” विषय पर पांच दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम (FDP) का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में तकनीकी व्याख्यानों के साथ सिमुलेशन आधारित एवं अनुप्रयोग-उन्मुख सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसमें राष्ट्रीय संस्थानों, अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों और उद्योग जगत से कुल 19 विशेषज्ञ वक्ता भाग लेंगे।
भारत के रिन्यूएबल ऊर्जा कार्यक्रम, जिसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट स्थापित क्षमता तथा वर्ष 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन हासिल करना है, को ध्यान में रखते हुए यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में विद्युत वाहन प्रणालियां, स्मार्ट ग्रिड तकनीक, ऊर्जा प्रबंधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा रिन्यूएबल ऊर्जा स्रोतों जैसे विषयों पर विशेष फोकस रहेगा।
इस आयोजन को , , क्वार्ब्ज इन्फो सिस्टम (Typhoon HIL), OPAL-RT तथा क्रिएटिव रोबोटिक्स जैसी संस्थाओं का सहयोग प्राप्त है।
कार्यक्रम संस्थान के कुलपति के संरक्षण में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम के अध्यक्ष इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष हैं, जबकि कार्यक्रम के समन्वयक आयोजन का नेतृत्व कर रहे हैं।
उद्घाटन सत्र में के रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर फॉर आयरन एंड स्टील, रांची के कार्यकारी निदेशक मुख्य वक्ता होंगे, जबकि समापन सत्र को संबोधित करेंगे।
कार्यक्रम में इटली, चीन, अमेरिका और भारत के प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ भाग लेंगे। के एसोसिएट प्रोफेसर विद्युत वाहन चार्जिंग और संचार नेटवर्क के एकीकरण पर व्याख्यान देंगे। वहीं से जुड़े फ्यूल सेल प्रणालियों पर चर्चा करेंगे।
के ऊर्जा दक्ष सॉफ्टवेयर एवं फर्मवेयर प्रथाओं पर प्रस्तुति देंगे, जबकि क्वार्ब्ज इन्फो सिस्टम की एप्लिकेशन इंजीनियर हार्डवेयर-इन-द-लूप सिमुलेशन पर चर्चा करेंगी।
इसके अतिरिक्त तथा अन्य संस्थानों के विशेषज्ञ भी अपने विचार साझा करेंगे।
संस्थान के अनुसार अब तक 19 भारतीय राज्यों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों— जिनमें सिंगापुर और इंटेल कैलिफ़ोर्निया शामिल हैं— से 120 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है।
कार्यक्रम समन्वयक ने कहा कि यह कार्यक्रम शिक्षकों और शोधकर्ताओं को स्मार्ट ग्रिड, एआई आधारित ऊर्जा प्रणालियों, विद्युत गतिशीलता और रिन्यूएबल ऊर्जा एकीकरण जैसे उभरते क्षेत्रों में व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि भारत का स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण केवल इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश पर नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से प्रशिक्षित शिक्षकों और शोधकर्ताओं की उपलब्धता पर भी निर्भर करेगा।
