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शिक्षा विकास की पूंजी, इसके बिना राज्य का विकास संभव नहीं : राष्ट्रपति

Gumla : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मंगलवार को गुमला जिले के रायडीह प्रखंड स्थित मांझाटोली में आयोजित दो दिवसीय अंतरराज्यीय जन सांस्कृतिक समागम ‘कार्तिक जतरा 2025’ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। हवाई मार्ग से गुमला पहुंची राष्ट्रपति का गार्ड ऑफ ऑनर के साथ भव्य स्वागत किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया, और सोहराई कला का प्रतीक चिन्ह राष्ट्रपति को भेंट किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका और छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णु देव साय भी मंच पर मौजूद रहे।

विश्वविद्यालय स्थापना और शिक्षा पर जोर

राष्ट्रपति ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पंखराज कार्तिक उरांव बाबा का सपना गुमला में विश्वविद्यालय स्थापित करना था। यह सपना जल्द पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा विकास की पूंजी है और शिक्षा के बिना राज्य का विकास संभव नहीं है। उन्होंने पंखराज कार्तिक उरांव को जनजातीय समाज और भारत के गौरव के रूप में याद किया। राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समाज की प्रतिभाओं को पहचान और प्रोत्साहन देना जरूरी है। उन्होंने जनजातीय हस्तशिल्प, संगीत और कला को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी समाज के पिछड़े वर्ग को हर सुविधा मिलनी चाहिए।

गांव और सामाजिक विकास पर बल

राष्ट्रपति ने कहा कि सभी को मिलकर गांवों का विकास करना होगा। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि झारखंड में सेवा करना उनके लिए तीर्थयात्रा जैसा अनुभव है। उन्होंने महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों और केंद्र सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए समाज के सशक्तिकरण पर जोर दिया।

नक्सलवाद पर छत्तीसगढ़ के सीएम का बयान

छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर में नक्सलवाद की समाप्ति के कारण विकास तेजी से हो रहा है। उन्होंने बताया कि वहां अब सड़क, बिजली, पानी और राशन जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।

स्व. कार्तिक उरांव और वीर सपूतों को नमन

झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने स्व. कार्तिक उरांव और परमवीर अलबर्ट एक्का को याद किया। उन्होंने कहा कि झारखंड की महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं।

लोक कला का प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था

कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों की आदिवासी नृत्य मंडलियों ने अपनी लोक कला का प्रदर्शन किया। राष्ट्रपति के आगमन को देखते हुए प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी और कार्यक्रम स्थल पर पुलिस बल तैनात किया गया था।

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