Dhanbad News: ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर देशभक्ति गीतों से गूंजा धनबाद, महागामा के कलाकारों ने बांधा समां
धनबाद, 27 अक्टूबर: स्वतंत्रता संग्राम के अमर गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर धनबाद और झरिया में तीन दिवसीय देशभक्ति कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सरस भारत और मारवाड़ी समाज की ओर से आयोजित ‘एक शाम देश के नाम’ कार्यक्रम में महागामा की संगीत टीम ने देशभक्ति गीतों की शानदार प्रस्तुति देकर श्रोताओं का मन मोह लिया।
24 से 26 अक्टूबर तक चले इस आयोजन में संगीत और काव्य-पाठ के माध्यम से देशप्रेम और राष्ट्रभक्ति की भावना को अभिव्यक्त किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।
महागामा के कलाकारों ने देशभक्ति गीतों से बांधा समां
आईआईटी (आईएसएम) धनबाद और झरिया स्थित अग्रवाल धर्मशाला में आयोजित कार्यक्रम में ईसीएल राजमहल के पूर्व चीफ इंजीनियर और कवि-संगीतकार सुशील साहिल के नेतृत्व में महागामा के कलाकारों ने प्रस्तुति दी।
कलाकारों ने ‘वंदे मातरम्’, ‘भारत का रहने वाला हूं’ और ‘संदेशे आते हैं’ समेत कई लोकप्रिय देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए। गीतों की प्रस्तुति के दौरान सभागार में मौजूद दर्शक देशभक्ति के रंग में रंगे नजर आए।
महागामा की संगीत टीम ने विभिन्न वाद्ययंत्रों के साथ गीतों की संगत की, जिससे कार्यक्रम और भी आकर्षक हो गया।
बाल कलाकारों की राजस्थानी प्रस्तुति ने जीता दिल
कार्यक्रम में सहरसा से पहुंचीं बाल कलाकार अभिश्री और आदित्री ने राजस्थानी गीतों की प्रस्तुति दी। दोनों की प्रस्तुति ने दर्शकों को खासा प्रभावित किया और कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भी देखने को मिला।
कवियों की रचनाओं से बना राष्ट्रप्रेम का माहौल
‘एक शाम देश के नाम’ कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे कवियों और साहित्यकारों ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। ओजपूर्ण देशभक्ति कविताओं के पाठ से कार्यक्रम स्थल पर उत्साह और राष्ट्रप्रेम का माहौल बना रहा।
संगीत और साहित्य के इस संगम ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
बड़ी संख्या में शामिल हुए लोग
कार्यक्रम में धनबाद के महापौर संजीव सिंह, आईआईटी (आईएसएम) के प्राध्यापक और विद्यार्थी, बुद्धिजीवी, व्यवसायी समेत बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
आयोजन को सफल बनाने में संयोजिका सोनी सुगंध के साथ धनबाद और झरिया के मारवाड़ी समाज के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
तीन दिवसीय कार्यक्रम के माध्यम से आयोजकों ने ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभक्ति, संस्कृति और साहित्य को एक मंच पर लाने का प्रयास किया।
