उच्च न्यायालय के आदेश के सात महीने बाद भी नहीं बनी बायोमेडिकल वेस्ट कमेटी : भाजपा
जमशेदपुर के अस्पतालों में मेडिकल कचरे के प्रबंधन को लेकर भाजपा ने राज्य सरकार से मांगा जवाब
पूर्वी सिंहभूम, 21 सितंबर । जमशेदपुर के सरकारी अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट के प्रबंधन को लेकर भाजपा ने राज्य सरकार पर सवाल उठाये हैं। भाजपा ने सोमवार को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट साझा करते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना साधा।
भाजपा की ओर से साझा की गयी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उच्च न्यायालय के निर्देश के सात महीने बाद भी जमशेदपुर के अस्पतालों और नर्सिंग होम में बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट कमेटी के गठन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।
रिपोर्ट के अनुसार, जमशेदपुर में करीब 154 अस्पताल और नर्सिंग होम हैं। इनमें 30 से अधिक बेड वाले 35 संस्थान उच्च न्यायालय के निर्देशों के दायरे में आते हैं। रिपोर्ट में एमजीएम अस्पताल और सदर अस्पताल में मेडिकल वेस्ट के उचित प्रबंधन को लेकर सवाल उठाये गये हैं। अस्पताल परिसर में मेडिकल कचरा जमा होने की तस्वीरों का भी उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, उच्च न्यायालय ने 26 फरवरी, 2026 के आदेश में बायोमेडिकल वेस्ट के संग्रह, पृथक्करण, भंडारण और निस्तारण की व्यवस्था को प्रभावी बनाने का निर्देश दिया था। इसके तहत 30 से अधिक बेड वाले अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट कमेटी गठित करने तथा छोटे अस्पतालों में नोडल अधिकारी नियुक्त करने की बात कही गयी थी।
अस्पतालों को अपनी मौजूदा व्यवस्था का गैप एनालिसिस कर आवश्यक सुधार करने के लिए समयसीमा भी निर्धारित की गयी थी। भाजपा ने आरोप लगाया कि न्यायालय के निर्देश के बावजूद व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
पार्टी ने कहा कि खुले में पड़े मेडिकल कचरे से मरीजों, चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों और आसपास रहने वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पैदा हो सकता है। भाजपा ने राज्य सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है।
रिपोर्ट में एमजीएम अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ. अरुण के हवाले से बायोमेडिकल वेस्ट के अनुचित प्रबंधन को संक्रमण का संभावित कारण बताया गया है।
