रांची

अक्षय तृतीया: अनंत पुण्य, समृद्धि और शुभारंभ का दिव्य पर्व — संजय सर्राफ

रांची | विशेष संवाददाता

विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि अक्षय तृतीया भारतीय संस्कृति का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है। इस वर्ष यह पर्व 20 अप्रैल को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा, जबकि कुछ स्थानों पर 19 अप्रैल को भी इसे मनाने की परंपरा है।

हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पड़ता है। ‘अक्षय’ शब्द का अर्थ है — जिसका कभी क्षय न हो। मान्यता है कि इस दिन किए गए दान-पुण्य, जप-तप और शुभ कार्यों का फल अनंत काल तक बढ़ता रहता है।

संजय सर्राफ ने बताया कि अक्षय तृतीया का धार्मिक और पौराणिक महत्व अत्यंत व्यापक है। मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म हुआ था, इसलिए इसे परशुराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। साथ ही, इसी दिन महर्षि वेदव्यास ने भगवान गणेश के माध्यम से महाभारत ग्रंथ की रचना का शुभारंभ किया था, जो ज्ञान और सृजन का प्रतीक है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मित्र सुदामा की दरिद्रता दूर कर उन्हें समृद्धि का आशीर्वाद दिया था। यह प्रसंग सच्ची मित्रता और निष्कपट भक्ति की महत्ता को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि अक्षय तृतीया को ‘अबूझ मुहूर्त’ माना जाता है, यानी इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए विशेष मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय, भूमि पूजन तथा वाहन या आभूषण की खरीदारी इस दिन विशेष रूप से शुभ मानी जाती है। सोना-चांदी खरीदने की परंपरा भी इसी विश्वास से जुड़ी है कि इससे समृद्धि में निरंतर वृद्धि होती है।

इस पर्व का एक महत्वपूर्ण पहलू दान-पुण्य भी है। इस दिन जल से भरे घड़े, अन्न, सत्तू, गुड़ और वस्त्र आदि का दान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। यह न केवल आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है, बल्कि समाज में सहयोग और सहानुभूति की भावना को भी मजबूत करता है।

संजय सर्राफ ने कहा कि अक्षय तृतीया का मुख्य उद्देश्य लोगों को धर्म, परोपकार और सद्कर्म के प्रति प्रेरित करना है। यह पर्व सकारात्मक सोच, नई शुरुआत और आत्मिक उन्नति का प्रतीक है।

उन्होंने अंत में कहा कि आज के भौतिकवादी युग में यह पर्व हमें मानवीय मूल्यों की ओर लौटने का संदेश देता है। अक्षय तृतीया केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को सार्थक, समृद्ध और संतुलित बनाने का एक अवसर है।


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