रांची

अपरा एकादशी पर श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में उमड़ा श्रद्धा और भक्ति का सैलाब

रांची : पुंदाग स्थित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर परिसर में श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा अपरा एकादशी का पावन पर्व श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। संत शिरोमणि परमहंस स्वामी सदानंद महाराज के सानिध्य में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ प्राप्त किया।

कार्यक्रम की शुरुआत सुबह विशेष पूजा-अर्चना से हुई। भक्तिमय वातावरण के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीहरि विष्णु एवं श्री राधा-कृष्ण का स्मरण करते हुए सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर भक्ति गीतों, मंत्रोच्चार और जयघोष से गुंजायमान रहा।

इस अवसर पर श्री राधा रानी का विशेष एवं अलौकिक श्रृंगार किया गया। सुंदर पोशाक और जड़ित आभूषणों से सुसज्जित स्वरूप ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। दिव्य दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिर की भव्य सजावट और भजन-कीर्तन ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

मंदिर के पुजारी पंडित अरविंद पांडे ने विधिवत मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना संपन्न कराई। भगवान को लड्डू, मेवा, फल एवं केसरिया दूध का विशेष भोग अर्पित किया गया। श्रद्धालुओं ने भी भगवान के चरणों में पुष्प एवं प्रसाद अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की।

पूजा-अर्चना के पश्चात सामूहिक महाआरती का आयोजन किया गया। दीपों की जगमगाहट, घंटियों की मधुर ध्वनि तथा “राधे-राधे” और “हरि बोल” के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने श्रद्धा एवं भक्ति भाव से आरती में भाग लेकर प्रभु कृपा की प्रार्थना की।

धार्मिक अनुष्ठान के उपरांत श्रद्धालुओं के बीच वेजिटेबल खिचड़ी प्रसाद का वितरण किया गया। बड़ी संख्या में उपस्थित भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान सेवा और समर्पण का सुंदर दृश्य देखने को मिला।

इस अवसर पर ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि सनातन धर्म में अपरा एकादशी का विशेष महत्व है। यह एकादशी पापों का नाश करने वाली तथा मोक्ष प्रदान करने वाली मानी जाती है। इस दिन व्रत, पूजा, दान एवं भगवान विष्णु के स्मरण से आध्यात्मिक शांति और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

उन्होंने कहा कि एकादशी व्रत केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और सकारात्मक जीवनशैली का संदेश भी देता है। ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में संस्कार, नैतिकता और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करते हैं।

प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि 16 मई को वट सावित्री पूजा के अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना एवं धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।

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