रांची

Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट से दुकानदारों को बड़ी राहत, रांची नगर निगम के लाइसेंस रद्द करने के आदेश निरस्त

रांची, 2 नवंबर। झारखंड हाईकोर्ट ने रांची नगर निगम को बड़ा झटका देते हुए जालान रोड और अपर बाजार के दुकानदारों के लाइसेंस रद्द करने तथा दुकानें खाली कराने से संबंधित आदेशों को निरस्त कर दिया है। न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने आठ रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए नगर निगम को सभी याचिकाकर्ताओं का पक्ष सुनने और संबंधित दस्तावेजों पर विचार करने के बाद नया कारणयुक्त आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक नगर निगम इस मामले में अंतिम निर्णय नहीं लेता, तब तक याचिकाकर्ताओं का दुकानों पर कब्जा प्रभावित नहीं किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया 12 सप्ताह के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया गया है।

जालान रोड और अपर बाजार की दुकानों से जुड़ा है विवाद

मामला जालान रोड और अपर बाजार स्थित दुकानों एवं जमीन के लाइसेंस और पुनः आवंटन से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं ने नगर निगम की ओर से 14 अक्टूबर 2014 को जारी लाइसेंस रद्द करने के आदेश, 4 दिसंबर 2014 को दुकान खाली करने के निर्देश और 13 फरवरी 2015 को पारित आदेश को चुनौती दी थी। अदालत ने सभी आठ याचिकाओं को एक साथ टैग कर सुनवाई की।

1966-67 में हुआ था जमीन का आवंटन

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया ने अदालत को बताया कि जालान रोड स्थित करीब 5100 वर्गफीट जमीन वर्ष 1966-67 में तत्कालीन रांची नगरपालिका ने मोहन लाल कच्ची को आवंटित की थी। वहां टेंट हाउस का कारोबार संचालित होता था। बाद में उनके उत्तराधिकारी महेंद्र कुमार कच्ची ने वर्ष 2000 में कुछ प्रार्थियों के साथ साझेदारी में कारोबार शुरू किया। आपसी सहमति से साझेदारी समाप्त होने के बाद जमीन प्रार्थियों के पक्ष में दोबारा आवंटित करने का अनुरोध किया गया।

अधिवक्ता के अनुसार, रांची नगर निगम ने 9 दिसंबर 2003 को जमीन प्रार्थियों के नाम आवंटित की थी। इसके बाद 5 जून 2004 को लाइसेंस शुल्क के आधार पर समझौता हुआ। जमीन पर स्थायी निर्माण के लिए निगम से अनुमति मांगी गई, जिसे 6 अगस्त 2004 को स्वीकृति भी मिली।

बाद में दुकानों के पुनः आवंटन को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। निगम ने 9 सितंबर 2014 को कारण बताओ नोटिस जारी किया। जवाब मिलने के बाद 14 अक्टूबर 2014 को लाइसेंस रद्द कर दुकानें खाली करने का आदेश जारी कर दिया गया।

नगर निगम ने लाइसेंस शर्तों के उल्लंघन का दिया तर्क

नगर निगम की ओर से अधिवक्ता राहुल कुमार ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन किया गया है और मामला दुकानों को दूसरे पक्ष को देने यानी सबलेटिंग से जुड़ा है। नगर निगम को संबंधित जमीन पर विकास कार्य कराने की आवश्यकता है। इसी आधार पर निगम की ओर से पारित आदेशों को उचित बताते हुए याचिकाएं खारिज करने का आग्रह किया गया।

अदालत ने कहा- तथ्यों और दस्तावेजों पर विचार करना जरूरी

दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने पाया कि नगर निगम की ओर से 14 अक्टूबर 2014 को पारित आदेश महज तीन पंक्तियों का था। इसमें याचिकाकर्ताओं की दलीलों और दस्तावेजों पर समुचित विचार नहीं किया गया था। इसी तरह 13 फरवरी 2015 के आदेश में भी संबंधित तथ्यों पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया।

अदालत ने कहा कि किसी वैधानिक प्राधिकार को सभी संबंधित तथ्यों और दस्तावेजों पर विचार करने के बाद ही आदेश पारित करना चाहिए। इसी आधार पर अदालत ने 14 अक्टूबर 2014, 4 दिसंबर 2014 और 13 फरवरी 2015 के आदेशों को निरस्त कर दिया।

नगर निगम को निर्देश दिया गया है कि वह याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का पूरा अवसर दे और दस्तावेजों पर विचार करने के बाद 12 सप्ताह के भीतर नया कारणयुक्त आदेश पारित करे। तब तक दुकानों पर याचिकाकर्ताओं का कब्जा बरकरार रहेगा।

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