जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में अधिकारियों की भूमिका की भी हो जांच : बाबूलाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार के पुराने और हालिया रुख में अंतर का उठाया सवाल, सीबीआइ जांच की मांग दोहरायी
जमशेदपुर, 20 सितंबर । नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने जेएसएससी-सीजीएल भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाये हैं। रविवार को जमशेदपुर सर्किट हाउस में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से उच्च न्यायालय में दाखिल हालिया जवाबी हलफनामे में यदि पूरी परीक्षा प्रक्रिया को अनियमितताओं से प्रभावित बताया गया है, तो पहले अदालत के समक्ष रखे गये तथ्यों को भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।
मरांडी ने कहा कि सरकार के पहले के रुख और हालिया हलफनामे में अंतर दिखाई दे रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि परीक्षा में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी थी तो पूर्व में हुई सीआइडी जांच में ये तथ्य सामने क्यों नहीं आये।
उन्होंने कहा कि लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े इस मामले की जांच ऐसी एजेंसी से होनी चाहिए, जिस पर सभी पक्षों का भरोसा हो। इसी आधार पर उन्होंने पूरे मामले की सीबीआइ जांच की मांग दोहरायी।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जांच केवल निचले स्तर पर आरोपित लोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। परीक्षा के संचालन, निगरानी और प्रशासनिक जिम्मेदारियों से जुड़े अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।
मरांडी ने सुधीर गुप्ता, अनुराग गुप्ता, प्रशांत कुमार और सीआइडी के एडीजी मनोज कौशिक की भूमिका की स्वतंत्र जांच की मांग की। उन्होंने प्रशांत कुमार और सुधीर गुप्ता को जेएसएससी से हटाने तथा मनोज कौशिक को सीआइडी एडीजी के पद से मुक्त करने की भी मांग रखी।
मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की जवाबदेही पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन को अनियमितताओं की जानकारी नहीं थी तो निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठता है और यदि जानकारी थी तो समय पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने अनुराग गुप्ता समेत पूर्व में जिम्मेदार पदों पर रहे अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की।
संवाददाता सम्मेलन में पूर्व मंत्री दुलाल भुइयां, भाजपा जिलाध्यक्ष संजीव सिन्हा, प्रबुद्ध प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक राजेश शुक्ला और मीडिया प्रभारी प्रेम झा मौजूद थे।
