झारखंड हाई कोर्ट ने सजा पुनरीक्षण बोर्ड के फैसलों का मांगा विस्तृत ब्योरा
रांची, 18 अगस्त । झारखंड उच्च न्यायालय ने राज्य में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे दोषियों की समयपूर्व रिहाई से संबंधित स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई की। अदालत ने राज्य सरकार से 30 जुलाई को हुई राज्य सजा पुनरीक्षण बोर्ड की बैठक में लिए गए निर्णयों की विस्तृत जानकारी मांगी है। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।
सुनवाई के दौरान झालसा की ओर से अधिवक्ता सुभम मिश्रा ने पक्ष रखा, जबकि उच्च न्यायालय की ओर से वरीय अधिवक्ता अमित कुमार दास ने पैरवी की।
मामले में बताया गया कि राज्य सजा पुनरीक्षण बोर्ड की बैठक नियमित रूप से आयोजित करने को लेकर उच्चतम न्ययालय ने राज्यों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत प्रत्येक तीन महीने में स्टेट सेंटेंस रिव्यू बोर्ड की बैठक आयोजित की जानी है। उच्चतम न्ययालय के निर्देश के अनुपालन की निगरानी झारखंड उच्च न्यायालय इस जनहित याचिका के माध्यम से कर रहा है।
इससे पहले राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय में शपथपत्र दाखिल कर निर्धारित तीन महीने की अवधि में बोर्ड की बैठक नहीं होने के कारणों की जानकारी दी थी। हालांकि, 30 जुलाई को हुई राज्य सजा पुनरीक्षण बोर्ड की बैठक में किन मामलों पर क्या निर्णय लिए गए, इसकी स्पष्ट जानकारी सरकार की ओर से अदालत को नहीं दी गई थी।
इसी पर उच्च न्यायालय ने सरकार से बोर्ड की बैठक में लिए गए निर्णयों का विस्तृत ब्योरा प्रस्तुत करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।
