JPSC परीक्षा विवाद: छात्रों का सत्याग्रह 9वें दिन भी जारी, छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे
रांची | 02 अगस्त: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थियों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। मोरहाबादी मैदान में चल रहा छात्रों का सत्याग्रह आंदोलन रविवार को 9वें दिन में प्रवेश कर गया।
इसी बीच, आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की घोषणा कर दी है।
📌 प्रमुख माँगें और आरोप
धरनास्थल पर एक विशाल सभा को संबोधित करते हुए छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने सरकार और आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए:
- 14वीं JPSC PT परीक्षा हो रद्द: छात्रों की प्राथमिक माँग है कि 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम में हुई कथित धांधली के कारण इसे तुरंत रद्द किया जाए।
- विवादित एजेंसी की हो निष्पक्ष जांच: JPSC, JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं का आयोजन कराने वाली एजेंसी की स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच कराई जाए।
- दोषियों पर कड़ा एक्शन: परीक्षा प्रक्रिया में शामिल किसी भी स्तर के दोषी अधिकारी या एजेंसी पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
“परीक्षा परिणाम आए एक महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन सरकार ने अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है। इससे अभ्यर्थियों में निराशा और आक्रोश बढ़ता जा रहा है। जब तक हमारी माँगें पूरी नहीं होतीं, सत्याग्रह और भूख हड़ताल जारी रहेगी।”
— देवेंद्र नाथ महतो, छात्र नेता🔍 JSSC की परीक्षाओं तक पहुँचा विवाद का दायरा
महतो ने दावा किया कि सत्याग्रह के दौरान विभिन्न स्तरों से जुटाए गए तथ्यों से कई चौंकाने वाली जानकारियाँ मिली हैं। उन्होंने कहा कि गड़बड़ी का दायरा केवल JPSC तक सीमित नहीं है, बल्कि JSSC द्वारा आयोजित CGL जैसी अन्य प्रमुख भर्ती परीक्षाओं तक फैल चुका है।
🕊️ “शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक रहेगा आंदोलन”
धरनास्थल पर मौजूद सैकड़ों अभ्यर्थियों ने एक स्वर में सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने की माँग की। छात्र नेताओं का कहना है कि:
- उनका यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक है।
- इसका मुख्य उद्देश्य राज्य की भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता (Transparency) लाना और लाखों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करना है।
आगे क्या?
अभ्यर्थियों के रुख से साफ़ है कि जब तक राज्य सरकार और आयोग की ओर से कोई सकारात्मक या लिखित आश्वासन नहीं मिलता, मोरहाबादी में छात्रों का यह शक्ति प्रदर्शन और भूख हड़ताल जारी रहेगी।
