विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर जागरूकता कार्यशाला, 2030 तक हेपेटाइटिस उन्मूलन का लक्ष्य : शशि प्रकाश झा

रांची, 28 जुलाई। विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर मंगलवार को होटल चाणक्या बीएनआर में हेपेटाइटिस के लक्षण, बचाव और रोकथाम को लेकर जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से समय पर जांच, टीकाकरण और जागरूकता के माध्यम से इस बीमारी की रोकथाम का संदेश दिया।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि झारखंड सरकार वर्ष 2030 तक हेपेटाइटिस उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ब्लॉक स्तर तक जागरूकता अभियान, समय पर स्क्रीनिंग और अर्ली डायग्नोसिस सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. कमलेश कुमार ने बताया कि हेपेटाइटिस लीवर से जुड़ी वायरल बीमारी है, जिसके पांच प्रकार होते हैं। इनमें हेपेटाइटिस-बी और सी सबसे गंभीर माने जाते हैं। उन्होंने बताया कि वायरल लोड जांच के लिए ट्रूनेट मशीनें राज्य के सभी पांच प्रमंडलों में उपलब्ध कराई जा रही हैं।
राज्य महामारी विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण कर्ण ने बताया कि हेपेटाइटिस-ए और ई दूषित भोजन एवं पानी से फैलते हैं, जबकि हेपेटाइटिस-बी और सी संक्रमित रक्त, असुरक्षित सुई, असुरक्षित यौन संबंध और संक्रमित मां से शिशु में फैल सकते हैं।
रिम्स के प्रोफेसर डॉ. अजीत डुंगडुंग ने कहा कि हेपेटाइटिस-सी के लगभग 99 प्रतिशत मामलों का सफल इलाज संभव है, जबकि हेपेटाइटिस-बी को आधुनिक दवाओं की मदद से प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। वहीं, सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने गर्भवती महिलाओं और अन्य जोखिम वाले लोगों से नियमित जांच कराने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान हेपेटाइटिस को मात देकर स्वस्थ जीवन जी रहे पवन पहनु, योगेश्वर बेदिया, रूबी देवी और मधु देवी समेत कई चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को सम्मानित किया गया। कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ चिकित्सक और विभिन्न कार्यक्रमों के राज्य स्तरीय नोडल पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।
