राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस तिरंगे के सम्मान, स्वाभिमान और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक : संजय सर्राफ
रांची : हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष एवं झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत में राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस प्रत्येक वर्ष 22 जुलाई को मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 1947 में संविधान सभा ने स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज ‘तिरंगे’ को औपचारिक रूप से अपनाया था। स्वतंत्रता प्राप्ति से कुछ सप्ताह पूर्व लिए गए इस ऐतिहासिक निर्णय ने देश को एक ऐसी पहचान दी, जो आज राष्ट्रीय गौरव, एकता, स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तीन समान क्षैतिज पट्टियों से बना है। सबसे ऊपर का केसरिया रंग साहस, त्याग और बलिदान का प्रतीक है। मध्य की सफेद पट्टी सत्य, शांति और पारदर्शिता का संदेश देती है, जबकि सबसे नीचे का हरा रंग समृद्धि, विकास और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। ध्वज के मध्य सफेद पट्टी पर अंकित गहरे नीले रंग का 24 तीलियों वाला अशोक चक्र न्याय, धर्म, सतत प्रगति और कर्मशील जीवन का संदेश देता है।
संजय सर्राफ ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस का उद्देश्य देशवासियों में तिरंगे के प्रति सम्मान, राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय कर्तव्यों के प्रति जागरूकता की भावना विकसित करना है। यह दिवस उन स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान का स्मरण कराने का भी अवसर है, जिन्होंने स्वतंत्र भारत के निर्माण के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की भावनाओं, संघर्षों और आकांक्षाओं का जीवंत प्रतीक है।
उन्होंने बताया कि इस अवसर पर विद्यालयों, महाविद्यालयों, सरकारी एवं निजी संस्थानों तथा सामाजिक संगठनों द्वारा ध्वजारोहण, राष्ट्रगान, देशभक्ति गीत, निबंध, चित्रकला, भाषण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से नई पीढ़ी को राष्ट्रीय ध्वज के इतिहास, उसकी गरिमा तथा सम्मान की परंपरा से परिचित कराया जाता है। साथ ही नागरिकों को भारतीय ध्वज संहिता का पालन करते हुए तिरंगे के सम्मान और उसके उचित उपयोग के प्रति जागरूक किया जाता है।
संजय सर्राफ ने कहा कि आज जब भारत विश्व मंच पर नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है, ऐसे समय में राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। यह दिवस हमें विविधता में एकता की शक्ति का एहसास कराता है तथा राष्ट्र की अखंडता, एकता और समृद्धि के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। उन्होंने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे तिरंगे के सम्मान को सदैव सर्वोपरि रखते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लें।
