सोनम वांगचुक के साथ हुई कार्रवाई निंदनीय, लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ : सुप्रियो भट्टाचार्य

रांची : झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने लद्दाख के शिक्षाविद एवं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को आमरण अनशन स्थल से हटाए जाने की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि वांगचुक को सफेद चादर की आड़ में जिस प्रकार जबरन उठाकर ले जाया गया, वह बेहद आपत्तिजनक और लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
शनिवार को झामुमो के प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि वांगचुक के आमरण अनशन के दौरान उनकी सेहत को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिशा-निर्देश दिए थे। यदि केंद्र सरकार को वास्तव में उनके स्वास्थ्य की चिंता थी, तो अनशन के शुरुआती 20 दिनों तक कोई पहल क्यों नहीं की गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि अनशन समाप्त कराने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई, जिससे ऐसा प्रतीत हुआ मानो किसी गंभीर अपराधी के खिलाफ कार्रवाई की जा रही हो। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने वाले व्यक्ति के साथ इस प्रकार का व्यवहार उचित नहीं ठहराया जा सकता।
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि सोनम वांगचुक को सफेद चादर में ढंककर ले जाने की घटना लोकतंत्र की गरिमा और नागरिक अधिकारों के सम्मान के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार असहमति की आवाजों को दबाने का प्रयास कर रही है तथा संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
झामुमो नेता ने कहा कि उनकी पार्टी लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि झामुमो लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए हर संवैधानिक और लोकतांत्रिक मंच पर अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी तथा किसी भी चुनौती का मजबूती से सामना करेगी।
