योग खेलों में पारदर्शिता को लेकर उठे सवाल, YFI ने सदस्यता और अंतरराष्ट्रीय दावों की जांच की मांग की
IOA के पत्र के बाद योगासन भारत की सदस्यता स्थिति पर बहस तेज
जयपुर। भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के एक हालिया पत्र के बाद योग खेलों के प्रशासन, सदस्यता और अंतरराष्ट्रीय दावों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। योग फेडरेशन ऑफ इंडिया (YFI) के महासचिव डॉ. अभिनव जोशी ने कहा है कि पत्र में “Proposed Membership Fee” लौटाए जाने का उल्लेख कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े करता है।
डॉ. जोशी ने कहा कि यदि योगासन भारत (पूर्व में NYSF) को वास्तव में भारतीय ओलंपिक संघ की एसोसिएट सदस्यता प्राप्त थी, तो पत्र में “Proposed Membership” शब्द का उल्लेख क्यों किया गया। उन्होंने इस विषय में पूर्ण पारदर्शिता बरतने तथा वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की।
योग खेलों के इतिहास को लेकर भी उठाए प्रश्न
डॉ. जोशी ने कहा कि योग खेलों का इतिहास किसी एक संस्था तक सीमित नहीं है। उन्होंने वर्ष 2016 में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) द्वारा मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (MDNIY) को जारी एक आधिकारिक पत्र का हवाला देते हुए कहा कि उसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग प्रतियोगिताओं के पहले से आयोजित होने का उल्लेख है। उनके अनुसार इससे यह स्पष्ट होता है कि योग खेलों की संगठित गतिविधियां वर्तमान संस्थाओं के गठन से पहले भी संचालित हो रही थीं।
एशियाई और विश्व चैंपियनशिप के दावों की स्वतंत्र जांच की मांग
योग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने तथाकथित “द्वितीय एशियाई योग चैंपियनशिप” और “प्रथम विश्व योग चैंपियनशिप” से जुड़े दावों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। डॉ. जोशी का कहना है कि इन प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले देशों, उनकी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय इकाइयों तथा आयोजनों से जुड़े तथ्यों की निष्पक्ष समीक्षा की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जनवरी 2025 में सिंगापुर में आयोजित 10वीं एशियाई योग चैंपियनशिप सहित योग खेलों का अंतरराष्ट्रीय इतिहास कई दशकों पुराना है। ऐसे में किसी भी आयोजन को “प्रथम” या “द्वितीय” घोषित करने से पहले उपलब्ध अभिलेखों और ऐतिहासिक तथ्यों का परीक्षण आवश्यक है।
सॉफ्टवेयर, रैंकिंग सिस्टम और वित्तीय पारदर्शिता पर भी सवाल
YFI ने प्रतियोगिताओं में उपयोग किए जा रहे सॉफ्टवेयर, रैंकिंग सिस्टम और पंजीकरण प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए हैं। संगठन ने मांग की है कि यह स्पष्ट किया जाए कि सॉफ्टवेयर विकास के लिए कोई टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई थी या नहीं, सरकारी अनुदान का उपयोग किस प्रकार किया गया तथा सभी प्रशासनिक प्रक्रियाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरी की गईं या नहीं।
हाल ही में आयोजित विश्व चैंपियनशिप की पदक तालिका का उल्लेख करते हुए डॉ. जोशी ने कहा कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बड़ी संख्या में पदक वितरित किए गए हैं। उनके अनुसार इन आंकड़ों की स्वतंत्र समीक्षा से प्रतियोगिता में वास्तविक भागीदारी और प्रतिस्पर्धा की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
खिलाड़ियों के हित में निष्पक्ष जांच की मांग
डॉ. जोशी ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी संस्था या व्यक्ति का विरोध करना नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के हितों की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि योग भारत की सांस्कृतिक धरोहर है और योग खेलों का भविष्य पारदर्शिता, जवाबदेही, निष्पक्षता तथा खिलाड़ियों के हितों को केंद्र में रखकर ही सुरक्षित किया जा सकता है।
उन्होंने केंद्र सरकार, भारतीय ओलंपिक संघ और भारतीय खेल प्राधिकरण से योग खेलों से जुड़े विवादित मुद्दों, अंतरराष्ट्रीय दावों, वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की, ताकि खिलाड़ियों और योग समुदाय का विश्वास और मजबूत हो सके।

