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झारखंड को नई रेल परियोजना का तोहफा, गुमला-लोहरदगा के लिए 291 किमी लाइन मंजूर

Gumla : दक्षिणी झारखंड के लोगों का वर्षों पुराना इंतजार अब खत्म होने की ओर है। गुमला, लोहरदगा, जशपुर और आसपास के इलाकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। केंद्र सरकार ने लोहरदगा से गुमला होते हुए छत्तीसगढ़ के धरमजयगढ़ तक नई रेलवे लाइन बिछाने की महत्वाकांक्षी परियोजना को अधिसूचित कर दिया है। करीब 291.881 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन को क्षेत्र के विकास के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। इस परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद इलाके के लोगों में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे न सिर्फ यात्रा आसान होगी, बल्कि रोजगार, व्यापार और पर्यटन को भी नई रफ्तार मिलेगी।

सांसद सुखदेव भगत के प्रयास लाए रंग

लोहरदगा के सांसद सुखदेव भगत लंबे समय से इस रेल परियोजना को लेकर प्रयासरत थे। उन्होंने संसद में दो बार इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया और रेल मंत्रालय के समक्ष लगातार इसकी पैरवी की। इसके अलावा उन्होंने केंद्रीय रेल मंत्री से मुलाकात कर भी इस परियोजना को जल्द मंजूरी देने की मांग की थी। सांसद ने अपने पक्ष में यह भी रखा था कि गुमला जिला परमवीर चक्र विजेता लांस नायक अल्बर्ट एक्का की जन्मभूमि है। साथ ही आंजन धाम, टांगीनाथ और सीरा-सीता नाला जैसे धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के स्थल भी इसी क्षेत्र में हैं। ऐसे में इन स्थानों को बेहतर रेल संपर्क से जोड़ना बेहद जरूरी है।

झारखंड और छत्तीसगढ़ के बीच मजबूत होगा रेल नेटवर्क

रेल मंत्रालय के ब्लूप्रिंट के अनुसार नई रेल लाइन लोहरदगा से शुरू होकर सेन्हा, घाघरा, टोटो, गुमला और रायडीह के पोगरा क्षेत्र से गुजरते हुए छत्तीसगढ़ के लोदाम, जशपुर और आगे धरमजयगढ़ तक पहुंचेगी। इस पूरे मार्ग पर कई नए रेलवे स्टेशन भी बनाए जाएंगे। इस परियोजना से झारखंड और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों को पहली बार बेहतर रेल संपर्क मिलेगा। लंबे समय से परिवहन सुविधाओं से वंचित इलाकों के लिए यह परियोजना किसी बड़ी सौगात से कम नहीं मानी जा रही है। नई रेल लाइन बनने के बाद गुमला और आसपास के जिलों के लोगों को ट्रेन पकड़ने के लिए रांची, लोहरदगा या दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। वे अपने ही क्षेत्र से सीधे देश के बड़े शहरों तक रेल यात्रा कर सकेंगे। इससे समय और पैसे दोनों की बचत होगी।

किसानों और व्यापारियों को होगा सीधा फायदा

यह रेल लाइन कृषि और खनिज संपदा से समृद्ध इस इलाके के लिए आर्थिक रूप से भी काफी अहम साबित होगी। किसान अपनी गतिविधियां, फल और अन्य कृषि उत्पाद आसानी से बड़े बाजारों तक पहुंचा काबू। इससे उन्हें बेहतर कीमत मिलने की संभावना जितनी और बिचौलियों पर निर्भरता भी कम होगी। वहीं, खनिज आधारित उद्योगों और स्थानीय व्यापार को भी नई गति मिलेगी। बेहतर परिवहन सुविधा मिलने से निवेश की बढ़ोतरी बढ़ेगी और नए उद्योग स्थापित होने का रास्ता खुलेगा।

पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

रेल संपर्क बेहतर होने से आंजन धाम, टांगीनाथ और अन्य धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी। इससे पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। पर्यटन बढ़ने के साथ होटल, परिवहन, रेस्टोरेंट, छोटे कारोबार और सेवा क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिलने की संभावना बढ़ेगी, जिससे पलायन पर भी काफी हद तक रोक लग सकेगी। करीब 292 किलोमीटर लंबी यह नई रेलवे लाइन सिर्फ एक परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि दक्षिणी झारखंड और उत्तरी छत्तीसगढ़ के सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक विकास की मजबूत नींव मानी जा रही है। परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद लोगों को अब इसके जल्द निर्माण शुरू होने का इंतजार है। क्षेत्र के लोगों को उम्मीद है कि यह रेल लाइन आने वाले वर्षों में पूरे इलाके की तस्वीर बदलने का काम करेगी।

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