मानसून केरल पहुंचा, इस बार 3 दिन देर से; अगले 7 दिनों तक भारी बारिश का अनुमान

नई दिल्ली, 4 जून। देशभर के लोगों को भीषण गर्मी से राहत देने वाला दक्षिण-पश्चिम मानसून आखिरकार केरल पहुंच गया है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने गुरुवार को केरल में मानसून के आगमन की आधिकारिक घोषणा की। सामान्य तौर पर मानसून हर वर्ष 1 जून तक केरल पहुंच जाता है, लेकिन इस बार इसका आगमन 4 जून को हुआ है, यानी यह अपने निर्धारित समय से लगभग तीन दिन देर से पहुंचा है।
मौसम विभाग के अनुसार, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में अनुकूल परिस्थितियां बनने के बाद मानसून ने केरल में प्रवेश किया। इसके साथ ही राज्य के कई हिस्सों में तेज बारिश शुरू हो गई है। मानसून के आगमन से केरल सहित दक्षिण भारत के अन्य राज्यों में तापमान में गिरावट आने और लोगों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।
आईएमडी ने अगले सात दिनों के दौरान केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर भारत के कई क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने केरल के कई जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट भी जारी किया है। लगातार हो रही बारिश को देखते हुए निचले इलाकों में जलभराव, भूस्खलन और यातायात प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की गई है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की है।
मानसून का आगमन भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। देश की लगभग आधी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है और खरीफ फसलों की बुवाई काफी हद तक मानसूनी वर्षा पर आधारित होती है। धान, मक्का, सोयाबीन, कपास और दलहन जैसी प्रमुख फसलों के लिए समय पर बारिश आवश्यक होती है। ऐसे में मानसून के आगमन की खबर किसानों के लिए राहत लेकर आई है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून की शुरुआत भले ही थोड़ी देरी से हुई हो, लेकिन आने वाले दिनों में इसके तेजी से आगे बढ़ने की संभावना है। यदि बारिश सामान्य रहती है तो कृषि उत्पादन, जलाशयों के जलस्तर और पेयजल आपूर्ति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। फिलहाल देशभर के किसानों, व्यापारियों और आम नागरिकों की नजरें मानसून की आगे की प्रगति पर टिकी हुई हैं, क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र के लिए मानसून की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
