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राजा राममोहन राय ने भारतीय समाज को नई दिशा दी : संजय सर्राफ

रांची: संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत के महान समाज सुधारक, शिक्षाविद् और आधुनिक भारतीय नवजागरण के जनक माने जाने वाले राजा राममोहन राय की जयंती प्रतिवर्ष 22 मई को मनाई जाती है। उनका जन्म 22 मई 1772 को पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के राधानगर गांव में हुआ था।

हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि राजा राममोहन राय ने भारतीय समाज में फैली कुरीतियों, अंधविश्वासों और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ संघर्ष कर समाज को नई दिशा देने का कार्य किया। उन्होंने विशेष रूप से सती प्रथा, बाल विवाह, जातिगत भेदभाव और महिलाओं के शोषण के विरुद्ध आवाज उठाई।

उन्होंने कहा कि राजा राममोहन राय के अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप वर्ष 1829 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने सती प्रथा पर प्रतिबंध लगाया, जिसे भारतीय समाज सुधार के इतिहास में ऐतिहासिक उपलब्धि माना जाता है।

संजय सर्राफ ने कहा कि राजा राममोहन राय आधुनिक शिक्षा के प्रबल समर्थक थे। उनका मानना था कि समाज के विकास के लिए वैज्ञानिक सोच और आधुनिक शिक्षा बेहद जरूरी है। उन्होंने अंग्रेजी शिक्षा, विज्ञान, गणित और आधुनिक विषयों के अध्ययन को बढ़ावा दिया, साथ ही भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को भी महत्व दिया।

उन्होंने बताया कि वर्ष 1828 में राजा राममोहन राय ने ब्रह्म समाज की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य धार्मिक आडंबरों, मूर्तिपूजा और अंधविश्वासों का विरोध करते हुए सामाजिक सुधार और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देना था।

संजय सर्राफ ने कहा कि राजा राममोहन राय भारतीय पत्रकारिता के भी अग्रदूत माने जाते हैं। उन्होंने प्रेस की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी का समर्थन किया। उनके विचार आज भी समाज के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उस दौर में थे।

उन्होंने कहा कि राजा राममोहन राय जयंती हमें शिक्षा, सामाजिक समानता, नारी सम्मान और मानवता के मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देती है। आज जरूरत है कि हम उनके बताए मार्ग पर चलकर एक जागरूक, शिक्षित और प्रगतिशील समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।

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