शनिवार को मनाई जाएगी शनि देव जयंती, सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की देती है प्रेरणा : संजय सर्राफ
रांची : विश्व हिंदू परिषद झारखंड सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि हिंदू धर्म में न्याय के देवता एवं कर्मफलदाता भगवान शनिदेव की जयंती अत्यंत श्रद्धा, आस्था और भक्ति के साथ मनाई जाती है। इस वर्ष शनि जयंती 16 मई, शनिवार को पड़ रही है, जो अपने आप में अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग माना जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शनिवार के दिन शनि जयंती का पड़ना विशेष पुण्यदायी एवं कल्याणकारी होता है।
उन्होंने कहा कि इस दिन भगवान शनिदेव की विधिवत पूजा-अर्चना करने से जीवन के कष्ट, बाधाएं एवं ग्रह दोष दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शनिदेव सूर्यदेव और माता छाया के पुत्र हैं। वे न्यायप्रिय देवता माने जाते हैं और मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं।
शनि जयंती ज्येष्ठ अमावस्या के दिन मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शनिदेव का जन्म हुआ था। इस अवसर पर श्रद्धालु उपवास रखकर तेल, तिल, उड़द, काले वस्त्र एवं लोहे का दान करते हैं तथा शनि मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
संजय सर्राफ ने कहा कि शनि जयंती का मुख्य उद्देश्य लोगों को सत्य, न्याय, अनुशासन एवं अच्छे कर्मों की प्रेरणा देना है। शनिदेव को कठोर दंड देने वाला देवता माना जाता है, लेकिन वे सद्कर्म करने वालों पर विशेष कृपा भी बरसाते हैं। यही कारण है कि श्रद्धालु इस दिन अपने जीवन की परेशानियों, आर्थिक संकट, रोग, शत्रु बाधा एवं शनि दोष से मुक्ति की कामना करते हुए पूजा-पाठ करते हैं।
उन्होंने बताया कि इस दिन पीपल वृक्ष की पूजा, सरसों के तेल का दीपक जलाना, शनि स्तोत्र एवं हनुमान चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। कई स्थानों पर भंडारा, दान-पुण्य एवं धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन भी किया जाता है। श्रद्धालु काले तिल एवं तेल से शनिदेव का अभिषेक कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
उन्होंने कहा कि शनि जयंती केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि आत्मचिंतन एवं कर्म सुधार का संदेश देने वाला पावन अवसर भी है। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में सदैव सत्य, ईमानदारी और धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। शनिवार को पड़ रही इस वर्ष की शनि जयंती श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी एवं मंगलकारी मानी जा रही है।
