Sheetala Ashtami 2026 : शीतला अष्टमी व्रत 11 मार्च को, जानें पूजा विधि, भोग और शुभ मुहूर्त
चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी का व्रत किया जाता है। शीतला अष्टमी को कई जगहों पर बसौड़े के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन माता शीतला की पूरे विधि विधान के साथ पूजा की जाती है। माता को बासी खाने को भोग लगाया जाता है। इस व्रत की तैयारी सप्तमी तिथि से ही शुरु हो जाती है। माता को जो भी भोग लगाना होता है वह सप्तमी तिथि को ही तैयार कर लिया जाता है। इस बार शीतला अष्टमी का व्रत 11 मार्च को किया जाएगा।
शीतला अष्टमी का व्रत चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस बार शीतला अष्टमी का व्रत 11 मार्च को किया जाएगा। मान्यता है कि शीतला माता की पूजा करने से बच्चे निरोगी रहते हैं और माता शीतला परिवार के सभी सदस्यों की रक्षा करती हैं। जानें शीतला अष्टमी पूजा विधि, मंत्र, भोग और मुहूर्त।
शीतला अष्टमी 2026 कब है ? (Sheetla Ashtami Vrat 2026)

पंड़ित राकेश झा ने बताया कि चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 11 मार्च को है। अष्टमी तिथि का आरंभ 10 मार्च को रात 1 बजकर 55 मिनट से शुरू होगा और अष्टमी तिथि समाप्त 12 मार्च को सुबह 4 बजकर 20 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, शीतला अष्टमी का व्रत 11 मार्च को ही किया जाएगा।
शीतला अष्टमी पूजन शुभ मुहूर्त

शीतला माता को लगाएं इन चीजों का भोग
शीतला अष्टमी पर माता शीतला को मीठे चावलों का भोग लगाया जाता है। इन चावलों को गुड़ या गन्ने के पस में ही बनाया जाता है। सप्तमी तिथि की रात को इस प्रसाद को तैयार किया जाता है। बता दें कि शीतला अष्टमी के दिन घर में चुल्हा नहीं जलाया जाता है एक दिन पहले की सारा खाना बनाकर रखा जाता है।
माता शीतला के मंत्र
शीतला अष्टमी के दिन माता शीतला के इन मंत्रों का जप करने से माता शीतला का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही घर परिवार में सुख समृद्धि मिलती है और माता शीतला परिवार के सभी सदस्यों को निरोगी रखती है।
1) शीतले त्वं जगन्माता शीतले त्वं जगत्पिता। शीतले त्वं जगद्धात्री शीतलायै नमो नमः॥
2) ओम ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः॥
शीतला अष्टमी पूजा विधि
1) शीतला अष्टमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें। इसके बाद अपने घर के मंदिर में बैठतक सबसे पहले ओम ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः मंत्र का जप कम से कम 108 बार करें।
2) इसके बाद सबसे पहले माता को कच्चे दूध और पानी को मिलाकर स्नान कराएं।
3) अब माता शीतला को पुड़े, दही, रोटी, मीठे चावल आदि का भोग लगाएं।
4) इसके बाद माता को सभी सामान बिना दीपक जलाएं अर्पित कर दें और हाथ जोड़कर बोले हे माता शीली ठंड़ी रहना।
