Mahashivratri 2026 Puja Vidhi Mantra : महाशिवरात्रि पूजा विधि और मंत्र, शिवपुराण से जानें रुद्राभिषेक का सही तरीका
Mahashivratri 2026 Puja Vidhi Mantra : महाशिवरात्रि का पर्व हर साल फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस साल महाशिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी को किया जाएगा। महाशिवरात्रि शिव भक्ति के लिए विशेष फलदायी मानी गई है। सभी शिव भक्त श्रद्धापूर्वक इस व्रत को करते हैं इनकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है। शिवपुराण में महाशिवरात्रि की पूजा की सारी विधि बताई गई है। आइए जानते हैं महाशिवरात्रि पूजा की संपूर्ण विधि और मंत्र।
महाशिवरात्रि पूजन विधि और मंत्र ( Mahashivratri 2026 Puja Vidhi And Mantra)
1) महाशिवरात्रि के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें। इसके बाद स्नान करके मन में ही व्रत का संकल्प लें।
2) ध्यान मंत्र
इसके बाद पूजा करने के लिए सबसे भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें और पहले एक लाल रंग का आसन लें और इसके बाद ध्यान करें। ध्यान करते हुए बोले कैलासेकमनीयरत्नरवचिते कलपद्रुमूले स्थितम् कर्पूस्फटिकेन्दु सून्दरतनुं कात्ययनी-सेवितम् । गंगातुंगतरंग-रंजित-जटाभारं कंठालंकृतशेषभूषणममुं मृत्युंजयं भावये कृपासागरं।
3) आवाहन मंत्र
इसके बाद शिव परिवार का आवाहन करें और बोले गंधर्वकिन्नरमहर्षिसुरेन्द्रवृन्दैः संसेव्यमान चरणं वृषभाधिरुढम् । आवाहयामि गिरिजासहितं प्रसन्नं भक्तया सुखागतमहं शिरसा नमामि ॥
4) आसन मंत्र
अब आसन की पूजा करें और बोलें सिंहासनं कनकरत्नमणिप्रभास्वान छत्रं ध्वजालसितचामरतोरणाढ्यम् । बार्लाककोटिसदृशं कनकां बराढ्यं श्रीविश्वनाथ मनसैव मयार्पितं ते ॥
5)पाद्य मंत्र
इसके बाद भगवान को चरण साफ करें और जल अर्पित करें। इस समय बोले दूर्वांकुरांबुजमनोहर पुष्पयुक्तं शुद्धं जलं सुरभिचूर्ण समन्वितं च। सौवर्णपात्रविलसत् पदयोर्विशुद्धं पाद्यं गृहाण जगदीश मयार्पितं ते ॥
6) अर्घ्य मंत्र
अब भगवान की प्रतिमा का अर्घ्य देते हुए कहें
दूर्वायवाक्षतसुगंधिहिरण्यरत्न दर्भाब्ज पुष्प मिलतं सलिलं च गांगम् ।
सौवर्णपात्ररचितं फलयुक्तमर्थ्य भो विश्वनाथ मनसैव मयार्पितं ते ॥५ ॥
7) आचमन मंत्र
अब हाथ में थोड़ा जल लेकर आचमन करें। गंगाजलैरमृत माधुरतामुपन्नैः एलालविंगशुभगंधमनोभिरामम् । गौरीपते कनकपात्रधृतंमया ते भक्तयार्पितं सुचिरमाचमनं गृहाण ॥६ ॥
8)पय मंत्र
अब हाथ में थोड़ा जल लेकर उसे पिए। इसके लिए बोले दिव्यौषधीद्रवभवं नवनीतपूर्ण क्षीराब्धिसंभृतसुधाधिक धामधारम् । स्वर्धेनुसंभवमपूर्वसुमिष्टमेतत्। स्नानाय शुद्धमुररीकुरु देव दुग्धम् ॥७ ॥
भगवान शिव अभिषेक विधि और मंत्र (Mahashivratri 2026 Rudra Abhishek Vidhi)
9) दूध से करें अभिषेक
अब शिवलिंग का अभिषेक करें सबसे पहले दूध से उनका अभिषेक करें और बोलें कर्पूरकुदकुमुदेन्दुकरावदात मल्लिप्रफुल्लकुसुमाकरकान्तिकान्तम् । स्नानाय शुद्धरसराजसुकोमलार्चि-स्निग्धं शुभं दधि दयानिधयेऽर्पयामि ॥७ ॥
10) घी से करें अभिषेक
अब शिवलिंग का अभिषेक गाय के शुद्ध घी से करें। घी से अभिषेक करते समय बोले तेजोमयेन तपनद्युतिपावितेन गव्येन भव्यविधिना परमंत्रितेन । वन्हौ सृतेन रचयामि रसावृतेन भौमामृतेन च घृतेन तवाभिषेकम् ॥९ ॥
11) मधु से करें अभिषेक
इसके बाद शहद शिवलिंग पर अर्पित करें। शहर से अभिषेक करते हुए बोलें नानाविधौषधिलतारससंभृतान्त-माधूर्यमिष्टममृतप्रतिभं गुणेन। माणिक्यपात्रभरितं तव मूर्धिसिक्तं अंगीकुरुष्व मधु देव महेश शंभो ॥१० ॥
12) शक्कर से करें अभिषेक
शहद के बाद शक्कर से शिवलिंग का अभिषेक करें। शक्कर अर्पित करते समय बोलें पूर्णेक्षुसागरसुभ्दवयातिनिम्ना मुक्ताफलद्रवसुधाधिकया महिम्ना। सर्वांगशोधनविधौ वरया त्रिनेत्र सुस्नाहि सिद्धवरशर्करया महेश ॥ ११ ॥
13) मधुपर्क से करें अभिषेक
इसके बाद एक शहद, दूध, दही, शक्कर और घी सभी को एक साथ मिलाकर शिवलिंग से अभिषेक करें। सम्यक्पयो दधि मधुघृतशर्कराभिः गंगाजलैः कनक कुंभधृतैः सुमंत्रैः । कर्पूरकेसरसुगंधिभिरिन्दुमौले स्नानाय शुद्धमधुपर्कमिदं गृहाण ॥
