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रांची में 2nd ऑल इंडिया जजेज बैडमिंटन टूर्नामेंट 2026 का भव्य शुभारंभ


रांची : झारखंड हाई कोर्ट के तत्वावधान में आयोजित 2nd ऑल इंडिया जजेज बैडमिंटन टूर्नामेंट 2026 का शुभारंभ शनिवार को रांची के खेलगांव स्थित ठाकुर विश्वनाथ शहदेव इंडोर स्टेडियम में हुआ। उद्घाटन समारोह में झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। उन्होंने न्यायमूर्ति रोंगोन मुखोपाध्याय, न्यायमूर्ति अनुभा रावत चौधरी और भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान निक्की प्रधान के साथ संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर प्रतियोगिता का औपचारिक उद्घाटन किया।

इस अवसर पर उपस्थित न्यायाधीशों, खिलाड़ियों और अतिथियों को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान ने कहा कि खेल न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं, बल्कि मानसिक तनाव को कम कर कार्यक्षमता और एकाग्रता भी बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका से जुड़े अधिकारियों के लिए ऐसे खेल आयोजन आपसी सौहार्द, टीम भावना और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देते हैं, जो उनके पेशेवर जीवन में भी सहायक सिद्ध होते हैं।

यह राष्ट्रीय स्तर का बैडमिंटन टूर्नामेंट 03 से 04 जनवरी 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। प्रतियोगिता में देश के 09 विभिन्न हाई कोर्ट से आए कुल 31 न्यायाधीश भाग ले रहे हैं। इनमें झारखंड, इलाहाबाद, मद्रास, तेलंगाना, बॉम्बे, ओडिशा, राजस्थान, केरल और कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश शामिल हैं। टूर्नामेंट में मेन सिंगल्स, मेन डबल्स, वूमेन सिंगल्स और मिक्स्ड डबल्स — इन चार श्रेणियों में रोमांचक मुकाबले खेले जा रहे हैं। पहले दिन खेले गए मैचों में खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट खेल कौशल और खेल भावना का परिचय दिया।

प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए खेलगांव परिसर में आधुनिक बैडमिंटन कोर्ट, खिलाड़ियों के ठहरने और विश्राम की उत्तम व्यवस्था, चिकित्सा सुविधा और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। आयोजन के दौरान जिला प्रशासन, रांची की भूमिका भी सराहनीय रही।

इस मौके पर न्यायमूर्ति रोंगोन मुखोपाध्याय ने प्रतियोगिता के बेहतर प्रबंधन और प्रशासनिक समन्वय के लिए रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन के सहयोग से ही इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन को सुचारु रूप से संपन्न किया जा रहा है।

यह टूर्नामेंट न केवल खेल प्रतिस्पर्धा का मंच है, बल्कि न्यायपालिका के भीतर आपसी संवाद और सौहार्द को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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