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“15 पदकों के शहंशाह जसपाल राणा नहीं रहे, भारतीय शूटिंग जगत में शोक की लहर”

शुक्रवार का दिन बेहद दुखद रहा। देश के महान निशानेबाज, द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कोच और राष्ट्रमंडल खेलों के सबसे सफल भारतीय खिलाड़ियों में शामिल जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से पूरे खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई। राष्ट्रीय राइफल संघ (NRAI) के अनुसार उन्होंने गुरुवार रात दिल्ली के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली।

राष्ट्रमंडल खेलों के सबसे सफल भारतीय निशानेबाजों में शुमार हैं

नई दिल्ली: भारतीय शूटिंग के इतिहास में का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। अपनी सटीक निशानेबाजी और शानदार उपलब्धियों के दम पर उन्होंने न केवल देश को कई अंतरराष्ट्रीय पदक दिलाए, बल्कि भारत में शूटिंग खेल को नई पहचान भी दिलाई। राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में भारत के लिए सर्वाधिक 15 पदक जीतने वाले जसपाल राणा आज भी भारतीय खेल जगत के प्रेरणास्रोत माने जाते हैं।

राष्ट्रमंडल खेलों में बनाया इतिहास

जसपाल राणा ने 1994, 1998, 2002 और 2006 के राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लेते हुए कुल 15 पदक अपने नाम किए। इनमें 9 स्वर्ण, 4 रजत और 2 कांस्य पदक शामिल हैं। यह उपलब्धि उन्हें राष्ट्रमंडल खेलों के सबसे सफल भारतीय निशानेबाजों में शामिल करती है।

एशियाई खेलों में भी दिखाया दम

राणा ने एशियाई खेलों में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 4 स्वर्ण, 2 रजत और 2 कांस्य पदक सहित कुल 8 पदक जीते। 2006 के दोहा एशियाई खेलों में उन्होंने 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में 590 अंक हासिल कर विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की थी।

जूनियर स्तर पर विश्व चैंपियन

साल 1994 में इटली के मिलान में आयोजित विश्व शूटिंग चैंपियनशिप में जसपाल राणा ने जूनियर वर्ग का स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया। इस उपलब्धि ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।

राष्ट्रीय पुरस्कारों से हुए सम्मानित

खेलों में उनके उत्कृष्ट योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा।

  • अर्जुन पुरस्कार – 1994
  • पद्म श्री – 1997
  • द्रोणाचार्य पुरस्कार – 2020 (कोचिंग के क्षेत्र में योगदान के लिए)

सफल कोच के रूप में नई पहचान

खिलाड़ी के रूप में शानदार करियर के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली और भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके मार्गदर्शन में कई युवा निशानेबाजों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की। इनमें , और प्रमुख हैं।

विशेष रूप से, की सफलता में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके मार्गदर्शन में मनु ने 2024 के पेरिस ओलंपिक में दो कांस्य पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया।

भारतीय शूटिंग के प्रेरणास्रोत

जसपाल राणा केवल एक महान खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि भारतीय शूटिंग के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले मार्गदर्शक भी हैं। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों को प्रेरित करती रहेंगी। राष्ट्रमंडल खेलों से लेकर एशियाई खेलों और कोचिंग के क्षेत्र तक, उनका सफर भारतीय खेल इतिहास के सबसे गौरवशाली अध्यायों में से एक माना जाता है।

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