सीएसआईआर-एनएमएल में 85वां स्थापना दिवस समारोह, वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता पर जोर
पूर्वी सिंहभूम, 30 सितंबर । सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनएमएल) में बुधवार को 85वां सीएसआईआर स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया गया। एनएमएल सभागार में आयोजित समारोह में हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) अनुपम मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
समारोह को संबोधित करते हुए सीएसआईआर-एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी ने कहा कि सीएसआईआर के 85 वर्ष केवल एक संस्थान की यात्रा नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक क्षमता, तकनीकी आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय विकास के लिए किए गए प्रयासों की लंबी विरासत का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि सीएसआईआर के संस्थापक निदेशक डॉ. शांति स्वरूप भटनागर ने विज्ञान को प्रयोगशालाओं तक सीमित रखने के बजाय उसे देश और समाज के विकास से जोड़ने की आवश्यकता को समझा था।
उन्होंने कहा कि एनएमएल की स्थापना राष्ट्रीय उद्देश्य के साथ की गई थी, जिसका लक्ष्य धातु, खनिज और पदार्थ विज्ञान के क्षेत्र में देश की क्षमता को मजबूत करना था। पिछले कई दशकों में एनएमएल के वैज्ञानिकों और अभियंताओं ने शोध को उद्योग की जरूरतों से जोड़ते हुए विभिन्न तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने वर्तमान पीढ़ी के वैज्ञानिकों से देश को आने वाले दशकों में वैज्ञानिक नेतृत्व की दिशा में आगे ले जाने की जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।
एनएमएल के पूर्व निदेशक डॉ. इंद्रनील चट्टोराज ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में स्वदेशी वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी आत्मनिर्भरता की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने महत्वपूर्ण खनिजों, उन्नत पदार्थों, टिकाऊ विनिर्माण, रीसाइक्लिंग और औद्योगिक स्तर की तकनीकों के विकास पर विशेष जोर दिया।
मुख्य अतिथि अनुपम मिश्रा ने स्थापना दिवस व्याख्यान में कार्यस्थल पर सुरक्षा, कर्मचारियों के कल्याण, जवाबदेही और वैज्ञानिक उत्कृष्टता की संस्कृति को संस्थागत विकास के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने वैज्ञानिक संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. जेके साहू ने की। समारोह में एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी, पूर्व निदेशक डॉ. इंद्रनील चट्टोराज, प्रशासन नियंत्रक जय शंकर शरण सहित संस्थान के वैज्ञानिक, अभियंता और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
