झारखंड विधानसभा मानसून सत्र :विधानसभा लोकतंत्र का सर्वोच्च जनमंच – रबींद्र नाथ महतो
रांची: झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र गुरुवार को दिवंगत हस्तियों को श्रद्धांजलि देने के बाद शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। सत्र के पहले दिन विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने अपने प्रारंभिक भाषण में लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक दायित्वों पर जोर देते हुए कहा कि “विधानसभा लोकतंत्र का सर्वोच्च जनमंच है।”
विधानसभा अध्यक्ष का संबोधन: संवाद और अनुशासन पर जोर
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने कहा कि संविधान ने विधानमंडलों को तीन प्रमुख दायित्व सौंपे हैं:
- विधेयकों पर विचार कर कानून बनाना।
- राज्य की वित्तीय व्यवस्था और बजट की समीक्षा व अनुमोदन करना।
- कार्यपालिका को जनता के प्रति उत्तरदायी बनाए रखना।
उन्होंने बताया कि इस सत्र के दौरान वित्तीय वर्ष 2026-27 का प्रथम अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा। साथ ही, जनहित के मुद्दों पर चर्चा और सरकार की जवाबदेही तय करने के लिए प्रश्नकाल के पांच कार्य दिवस निर्धारित किए गए हैं। वहीं, 12 अगस्त को गैर-सरकारी सदस्यों का कार्य निर्धारित है।
राष्ट्रीय औसत से आगे झारखंड विधानसभा
पीआरएस (PRS) के हालिया अध्ययन का हवाला देते हुए स्पीकर ने बताया कि वर्ष 2025 में देश के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं की औसत बैठक 24 दिन रही, जबकि झारखंड विधानसभा 30 दिनों तक संचालित हुई। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस मानसून सत्र में भी अनुशासन और सार्थक बहस के जरिए यह उत्कृष्ट रिकॉर्ड कायम रहेगा।
“लोकतंत्र केवल बहुमत का शासन नहीं, बल्कि संवाद, सहिष्णुता और विचारों के सम्मान की संस्कृति है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों इसके समान अंग हैं।” — रबींद्र नाथ महतो, अध्यक्ष (झारखंड विधानसभा)
दिवंगत हस्तियों और शहीदों को श्रद्धांजलि
सदन ने 2 मिनट का मौन रखकर दिवंगत पूर्व मंत्रियों, विधायकों, वरिष्ठ हस्तियों और शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की:
- पूर्व राजनेता: माधव लाल सिंह, मन्नान मलिक, बेनी प्रसाद गुप्ता, हरि राम, लक्ष्मण राम, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुकुल रॉय, डॉ. डी.वाई. पाटिल, और भुवन चंद्र खंडूरी।
- विशिष्ट हस्तियां: गायिका आशा भोसले, शायर बशीर बद्र, संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप, वरिष्ठ पत्रकार एच.के. दुआ, लोक कलाकार तीजन बाई, निशानेबाज जसपाल राणा, और खोरठा साहित्यकार सुरेश विश्वकर्मा।
- अन्य: जम्मू-कश्मीर और मणिपुर के शहीद जवान, उधमपुर सड़क दुर्घटना, लखनऊ अग्निकांड, असम बाढ़ के शिकार और नीट (NEET) परीक्षा तनाव के कारण जान गंवाने वाले छात्र।
असम बाढ़ पीड़ितों को सहायता और स्थानीय मुद्दे
- सहायता राशि: सदन में जानकारी दी गई कि झारखंड सरकार की ओर से असम के बाढ़ पीड़ितों के लिए 3 करोड़ रुपये की सहायता राशि भेजी गई है।
- स्थानीय क्षतिपूर्ति की मांग: शोक प्रस्ताव के दौरान मांडू विधायक निर्मल कुमार ने क्षेत्र में सड़क हादसों, जंगली हाथियों के हमलों, वज्रपात और खदान धंसने से हुई मौतों का मुद्दा उठाया और पीड़ित परिवारों को मुआवजे की मांग की।
