कोडरमा : राज्य के कोडरमा संसदीय क्षेत्र में 20 मई को मतदान होना है, जिसकी तैयारी पूरी हो चुकी है. विगत चुनाव में रिकार्ड मतों से जीत हासिल करने वाली भाजपा की अन्नपूर्णा देवी के लिए इस बार जीत की राह आसान नहीं है. दरअसल, भाजपा और झारखंड मुक्ति मोर्चा से ठोकर खाने के बाद कोडरमा संसदीय क्षेत्र से बतौर निर्दलीय प्रत्याशी जयप्रकाश वर्मा भाजपा के लिए परेशानी का सबब बने हैं. लिहाजा इस बार यहां त्रिकोणीय मुकाबला दिख रहा है.
कोडरमा संसदीय क्षेत्र में भंडारो गांव ने भाजपा की इस इलाके में नींव रखी थी. भंडारों के रीतलाल प्रसाद वर्मा कोडरमा से पांच बार सांसद बने थे. भाजपा के साथ ही भंडारो गांव तब कुशवाहा समाज की भी दिशा तय करती थी. रीतलाल वर्मा की लोकप्रियता ऐसी थी कि वर्ष 1980 में इंदिरा की आंधी और फिर से सत्ता में आने के दौरान भी वह सांसद बने थे. रीतलाल के बड़े भाई स्व. जगदीश प्रसाद कुशवाहा जिले में राजनीति के भीष्म पितामह का दर्जा रखते थे. तब पार्टी पर कुशवाहा समाज का दबदबा भी था लेकिन दोनों दिग्गजों की मौत के बाद अब कुशवाहा समाज उपेक्षित महसूस कर रहा है.
यही कारण है कि सबसे अधिक वोटर होने के बाद भी कुशवाहा समाज की उपेक्षा इस चुनाव में बड़ा फैक्टर बनकर उभरा है. इसी समाज के और स्व. रीतलाल वर्मा के सगे भतीजे जयप्रकाश वर्मा कोडरमा संसदीय क्षेत्र से बतौर निर्दलीय चुनाव मैदान में हैं. किसी भी राजनीतिक दल द्वारा कुशवाहा समाज को तरजीह न दिए जाने के कारण समाज असमंजस में तो है ही, भविष्य के लिए एकजुटता दिखाकर अपनी अलग राह तलाश रहा है.
कोडरमा में कुशवाहा, बनिया, यादव, मुस्लिम व भूमिहार समाज जीत और हर तय करते हैं. कोडरमा लोकसभा क्षेत्र में कुशवाहा राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई रहे हैं. यह भी सही है कि इससे सबसे अधिक नुकसान भाजपा को ही हो रहा है. कोडरमा में लगातार उपेक्षित महसूस कर रहा भूमिहार समाज भी इस बार भाजपा को सबक सिखाने के मूड में है. इस समाज की सांसद से नाराजगी इस कारण है कि अन्नपूर्णा के सांसद रहते इस समाज को उचित राजनीतिक हिस्सेदारी नहीं मिली. सांसद प्रतिनिधि की बात आई तो इनको पूछा नहीं गया.