Hanuman

हनुमान चालीसा का पाठ मनुष्य के जीवन में आशा का संचार करता है – हनुमान उपासक संतोष भाई

राँची

रांची : किसी भी प्रकार का शारीरिक अथवा मानसिक कष्ट हो या प्राणों पर संकट आ गया हो तो हनुमान चालीसा का पाठ मनुष्य के जीवन में आशा का संचार करता है. हनुमान चालीसा में एक पंक्ति है नासे रोग हरे सब पीरा जपत निरंतर हनुमत वीरा अर्थात किसी भी प्रकार का रोग होने से श्रद्धा के साथ हनुमान चालीसा का पाठ करें.

हनुमान जी की कृपा से शरीर की समस्त पीड़ा मिट जाती है

श्रद्धा और विश्वास की ताकत होती है, दवा के साथ दुआ भी करें. हनुमान जी की कृपा से शरीर की समस्त पीड़ा से मुक्ति मिल जाएगी यदि नित्य हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं तो निश्चित ही धीरे-धीरे तरह-तरह की बुराइयों से दूर होते चले जाएंगे जब व्यक्ति बुराइयों से दूर रहता है तो उसे आत्मिक बल मिलता है और मनोबल बढ़ता है इससे पवित्रता की भावना बढ़ती है और मनुष्य शरीर में हल्का पन महसूस करता है उसके मन से भय तनाव और असुरक्षा की भावना हट जाती है जीवन में यही सब रोग और शोक को मुक्त होने के लिए जरूरी है.

संतोष भाई ने 500 से अधिक श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया

श्री श्री बालाजी धाम बर्नपुर से रांची आए संतोष भाई ने 500 से अधिक श्रद्धालुओं को अपने हाथ से प्रसाद देते हुए आशीर्वाद दिया. महाराजा अग्रसेन भवन में श्री बालाजी धाम बर्नपुर कि रांची शाखा द्वारा आयोजित अखंड सवा लाख श्री हनुमान चालीसा पाठ के चौथे दिन सैकड़ों श्रद्धालुओं ने महाराज हनुमान के दरबार में मौन बैठ हनुमान चालीसा का पाठ किया पाठ करने बालों में महिलाओं की संख्या पुरुषों के मुकाबले दोगुनी रही. किसी ने 7 बार और किसी ने 111 बार हनुमान चालीसा का पाठ किया.

मुख्य यजमान अनिल-शोभा अग्रवाल की मौजूदगी में सुबह की आरती

मुख्य यजमान अनिल-शोभा अग्रवाल की मौजूदगी में सुबह की आरती प्रकाश और कल्पना अग्रवाल, प्रकाश और स्मृति देवी अग्रवाल ने की, जबकि शाम की आरती अनिल-शोभा अग्रवाल, सुरेश बजाज और भुरकुंडा के किशन बंसल ने की. दोपहर में अशोक धानुका और अजय अग्रवाल ने सवामनी प्रसाद का आयोजन किया. सुबह का भंडारा आलोक गुप्ता ने जबकि शाम के भंडारे में आलोक गुप्ता, पारस थापा, विजय बाजला और विकास बंसल ने सेवा निवेदित की.

राम मोहन महाराज ने भगवान राम के जन्म के कारणों पर प्रकाश डाला

बनारस से आए प्रख्यात कथावाचक राम मोहन महाराज ने श्री राम हनुमत कथा को आगे बढ़ाते हुए दूसरे दिन भगवान राम के जन्म के कारणों पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा भगवान विष्णु ने समय-समय पर अवतार लेकर दुनिया से पाप और पापियों का अंत किया. पाप का अंत करने के लिए ही भगवान को राम रूप में अवतार लेना पड़ा. रावण की एक गलती के कारण भगवान विष्णु को राम का अवतार लेना पड़ा था.

भगवान राम के रूप में अवतार ईश्वरीय विधान

ईश्वरीय विधान के अनुसार भगवान राम के रूप में अवतार लेकर पृथ्वी पर आए और रावण का वध किया. रावण की यही गलती थी कि उसने अनरनय के राज्य पर अधिकार करने के लिए आक्रमण किया था. अनरनय और रावण के बीच भीषण युद्ध हुआ. ब्रह्मा जी के वरदान के कारण अनरनय रावण के हाथों पराजित हुए. रावण उनका अपमान करने लगा और क्रोधित राजा ने रावण को शाप दिया कि तूने महात्मा इक्ष्वाकु के वंशजों का अपमान किया है, इसलिए ईश्वर को राजा दशरथ के पुत्र राम के हाथों से तुम्हारा वध होगा.

शिव विवाह का भी वर्णन किया

3 घंटे की कथा के दौरान उन्होंने शिव विवाह का भी वर्णन किया और कहा कि भगवान शिव का विवाह बहुत ही अनूठा और अद्भुत था. उनका विवाह बहुत ही अलग ढंग से हुआ था और बारात भी सबसे अलग थी. भगवान शिव के विवाह के बारे में पुराणों में वर्णन है कि शिव ने सबसे पहले सती से विवाह किया था और यह विवाह बड़ी जटिल परिस्थितियों में हुआ था.

सती के पिता दक्ष अपनी पुत्री का विवाह भगवान शिव से नहीं करना चाहते थे, लेकिन ब्रह्मा जी के कहने पर यह विवाह संपन्न हुआ. एक दिन राजा दक्ष ने भगवान शिव का अपमान किया जिससे नाराज होकर माता सती ने यज्ञ में कूदकर आत्मदाह कर ली. तारकासुर नामक एक असुर को वरदान मिला था कि उसका वध सिर्फ भगवान शिव की संतान ही कर सकती है तब सभी देवताओं ने मिलकर शिव और पार्वती के विवाह की योजना बनायी और शिव की तपस्या भंग करने के लिए कामदेव को भेजा.

देवताओं की विनती पर शिव पार्वती से विवाह को राजी हुए

कामदेव भस्म हो गए और देवताओं की विनती पर शिव पार्वती से विवाह करने के लिए राजी हुए. देवताओं ने भगवान शिव को परंपरा के अनुसार तैयार किया और सुंदर तरीके से श्रृंगार कर दोनों का विवाह संपन्न कराया. यह जानकारी श्री बालाजी धाम रांची शाखा के मीडिया प्रभारी विनोद पांडेय ने दी.

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