Navratri 2022

नवरात्रि अनुष्ठान में भावना युक्त ध्यान साधक के लिए अत्यंत आवश्यक

राँची

रांची : राष्ट्रीय सनातन एकता मंच एवं पवित्रम गो सेवा परिवार के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि नवरात्रि में तपस्या का अवलंबन करते हुए अनुष्ठान किया जाता है. ब्रह्मचर्य का अनुपालन, कम से कम आरामदायक बिस्तर पर शयन, लहसुन-प्याज, समुद्री नमक का परित्याग, अल्प कम से गरिष्ठ आहार, स्वच्छता एवं पवित्रता तथा शुद्ध वस्त्रों का आवरण इत्यादि दैनंदिनी तपस्या के सामान्य प्रक्रिया के रूप में अपनाए जाते हैं.

नवाह परायण पाठ, दुर्गा सप्तशती का पाठ

नवरात्रि अनुष्ठान के रूप में श्रीरामचरितमानस का नवाह परायण पाठ, दुर्गा सप्तशती का पाठ और मंत्रों-गायत्री, महामृत्युंजय, पंचाक्षरी, दुर्गा मंत्र काली मंत्र इत्यादि का जाप किया जाता है अथवा गुरु महाराज के संरक्षण में विशेष गोपनीय साधना (जाप) किया जाता है. या तो 9 दिन में साधना पूर्ण करके नौवें अथवा दशहरा के दिन हवन करके अनुष्ठान को पूर्णाहूति प्रदान किया जाता है.

ध्यान के लिए मानसिक जाप उत्तम है

पूजा पंडालों में मां दुर्गा सहित श्रीगणेश, श्री कार्तिकेय, मां सरस्वती, मां लक्ष्मी, महादेव की मूर्ति स्थापित कर प्राण प्रतिष्ठा करते हुए विधिवत पूजा-अर्चना और आरती करते हुए उत्सव पूर्वक त्यौहार के उमंग के साथ सामूहिक दर्शन और श्रद्धा सुमन अर्पित किया जाता है.

नवरात्रि के अनुष्ठान कभी निष्फल नहीं जाते

नवरात्रि अनुष्ठान में भावनायुक्त ध्यान साधक के लिए अत्यंत आवश्यक होता है. ध्यान के लिए मानसिक जाप उत्तम है जबकि होठ हिलता रहे जिह्वा और कंठ क्रियाशील रहे, स्वर का प्रवाह चलता रहे और ध्वनि इतना निम्न हो कि आस-पास का बैठा हुआ किसी को सुनाई न दे. आंखें बंद, मेरुदंड सीधी, पालथी मारकर बैठना जाप करने का सर्व सुलभ विधान है तथा नवरात्रि के अनुष्ठान कभी निष्फल नहीं जाते हैं.

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