Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट कल सुनाएगा कर्नाटक हिजाब प्रतिबंध पर फैसला, जजों में मतभेद

राष्ट्रीय

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पहनने पर प्रतिबंध को बरकरार रखने वाले कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर कल अपना फैसला सुनाएगा. न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की अध्यक्षता वाली और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की सर्वोच्च न्यायालय की दो-न्यायाधीशों की पीठ ने 23 याचिकाकर्ताओं, उनके वकीलों और कर्नाटक सरकार सहित सभी पक्षों की सुनवाई के बाद 26 सितंबर को दस दिन के लिए अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था. सुप्रीम कोर्ट कल 23 याचिकाओं पर फैसला सुनाएगा, जिनमें ऐशत शिफा और अन्य शामिल हैं.

कर्नाटक सरकार ने दिया था तर्क- स्कूल यूनिफॉर्म पहनने आदेश जारी करने का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में कर्नाटक सरकार ने तर्क दिया था कि उसके पास शैक्षणिक संस्थानों को निर्धारित स्कूल यूनिफॉर्म पहनने के अनुशासन का पालन करने का आदेश जारी करने का अधिकार है. छात्रों/याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने तर्क दिया कि मौलिक अधिकार, क्या पहनना है, यह चुनने की स्वतंत्रता और आस्था की स्वतंत्रता एक कक्षा के भीतर कम नहीं हो जाती.

कर्नाटक सरकार ने दावे के समर्थन में कुछ नहीं पेश किया

छात्रों के वकीलों – देवदत्त कामत, डॉ राजीव धवन और दिशंत दवे – ने सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) को प्रस्तुत किया कि कर्नाटक राज्य सरकार ने अपने दावे का समर्थन करने के लिए सबूत का एक टुकड़ा भी प्रस्तुत नहीं किया है कि कुछ छात्र अपनी कक्षाओं में हिजाब पहने हुए हैं, उनके संबंधित वर्दी के अलावा सार्वजनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य और नैतिकता का उल्लंघन किया. वकीलों ने आगे कहा कि कर्नाटक सरकार ने उनके इस दावे का समर्थन करने के लिए कोई सामग्री उपलब्ध नहीं करायी थी कि हिजाब पहनने से अन्य छात्रों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है.

सुप्रीम कोर्ट के जजों में हिजाब प्रतिबंध पर मतभेद, बड़ी पीठ करेगी फैसला

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कर्नाटक में प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों की कक्षाओं में छात्राओं के हिजाब पहनने पर राज्य सरकार के प्रतिबंध लगाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गुरुवार को विभाजित फैसला सुनाया. न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अलग-अलग राय देते हुए कहा कि इस मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजा जाएगा, ताकि सुनवाई के लिए बड़ी पीठ गठित की जा सके. उच्च न्यायालय ने 15 मार्च अपने फैसले में हिजाब पहने पर प्रतिबंध लगाने वाले राज्य सरकार के पांच फरवरी के आदेश को उचित ठहराया था. इसके खिलाफ शीर्ष अदालत में कई याचिकाएं दायर की गयी थीं.

न्यायमूर्ति गुप्ता ने उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा

शीर्ष अदालत की पीठ की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति गुप्ता ने उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा और (उच्च न्यायालय के) 15 मार्च के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों को खारिज कर दिया जबकि न्यायमूर्ति धूलिया ने उच्च न्यायालय के फैसले को खारिज कर दिया और अपीलकर्ताओं की याचिकाएं स्वीकार कर ली. न्यायमूर्ति धूलिया ने कहा, “यह (हिजाब पहनना) पसंद का मामला है, न ज्यादा और न ही कम.”

विभाजित फैसले के कारण राज्य सरकार का आदेश लागू रहेगा

शीर्ष अदालत के विभाजित फैसले के कारण राज्य सरकार का पांच फरवरी का वह आदेश लागू रहेगा, जिसमें कक्षाओं में हिजाब पहनने पर प्रतिबंध लगाया गया था. शीर्ष अदालत की दो सदस्यीय पीठ ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 10 दिनों की सुनवाई पूरी होने के बाद 22 सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान कर्नाटक सरकार का पक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रखा, जबकि याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, दुष्यंत दवे, देवदत्त कामत, सलमान खुर्शीद, हुज़ेफ़ा अहमदी, संजय हेगड़े, राजीव धवन आदि ने दलीलें पेश कीं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *