Man ki baat

Man ki baat : पीएम मोदी बोले- पद्म पुरस्कार विजेताओं के जीवन विस्तार से जानें और साझा करें

राष्ट्रीय

Man ki baat : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ (Man ki baat) में लोगों से अनुरोध किया कि वे इस बार के पद्म पुरस्कार विजेताओं के प्रेरक जीवन के बारे में विस्तार से जानें और इस जानकारी को दूसरों के साथ भी साझा करें.

इस बार धुन बिखेरने वाले, संस्कृति संरक्षकों को मिला पद्म पुरस्कार

प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ (Man ki baat) के 97वें संस्करण में कहा कि जनजातीय समुदायों में काम करने वाले, उनसे जुड़ी चीज़ों के संरक्षण और शोध करने वाले, पारंपरिक वाद्य यंत्र की धुन बिखेरने वाले और नॉर्थ-ईस्ट में अपनी संस्कृति के संरक्षण में लगे लोगों को इस बार प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है. हम सबको इस पर गर्व होना चाहिए.

पारंपरिक वाद्ययंत्र की धुन बिखेरनेवालों की चर्चा

उदाहण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि संतूर, बम्हुम, द्वितारा जैसे हमारे पारंपरिक वाद्ययंत्र की धुन बिखेरने में महारत गुलाम मोहम्मद ज़ाज़, मोआ सु-पोंग, री-सिंहबोर कुरका-लांग, मुनि-वेंकटप्पा और मंगल कांति राय की चारों तरफ़ चर्चा हो रही है. टोटो, हो, कुइ, कुवी और मांडा जैसी जनजातीय भाषाओं पर काम करने वाले कई महानुभावों को पद्म पुरस्कार मिले हैं. धानीराम टोटो, जानुम सिंह सोय और बी. रामकृष्ण रेड्डी के नाम से अब पूरा देश परिचित हो गया है.

जनजाति के साथ काम करने वाले भी हुए सम्मानित

Man ki baat : सिद्धी, जारवा और ओंगे जैसी आदि- जनजाति के साथ काम करने वाले लोगों को भी इस बार सम्मानित किया गया है. जैसे – हीराबाई लोबी, रतन चंद्र कार और ईश्वर चंद्र वर्मा जी. कांकेर में लकड़ी पर नक्काशी करने वाले अजय कुमार मंडावी और गढ़चिरौली के प्रसिद्ध झाडीपट्टी रंगभूमि से जुड़े परशुराम कोमाजी खुणे को भी ये सम्मान मिला है. इसी प्रकार नॉर्थ-ईस्ट में अपनी संस्कृति के संरक्षण में जुटे रामकुईवांगचे निउमे, बिक्रम बहादुर जमातिया और करमा वांगचु को भी सम्मानित किया गया है.

लोकतंत्र की जननी है भारत

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को लोकतंत्र की जननी बताया और कहा कि भारतीय समाज स्वभाव से ही एक लोकतांत्रिक समाज है. भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और हम भारतीयों को इस बात का गर्व भी है कि हमारा देश लोकतंत्र की जननी है. स्वभाव से ही हम एक लोकतांत्रिक समाज है.

डॉ. अम्बेडकर ने बौद्ध भिक्षु संघ की तुलना भारतीय संसद से की थी

Man ki baat : प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने बौद्ध भिक्षु संघ की तुलना भारतीय संसद से की थी. उन्होंने उसे एक ऐसी संस्था बताया था, जहां के प्रस्ताव, संकल्प, कोरम, मतदान और वोटों की गिनती के लिए कई नियम थे. बाबासाहेब का मानना था कि भगवान बुद्ध को इसकी प्रेरणा उस समय की राजनीतिक व्यवस्थाओं से मिली होगी.

तमिलनाडु के गांव उतिरमेसर स्थित शिलालेख से दुनिया अचंभित

तमिलनाडु में एक छोटा, लेकिन चर्चित गांव है उतिरमेसर, यहां ग्यारह-बारह सौ साल पहले का एक शिलालेख दुनियाभर को अचंभित करता है. यह शिलालेख एक छोटा संविधान की तरह है. इसमें विस्तार से बताया गया है कि ग्राम सभा का संचालन कैसे होना चाहिए और उसके सदस्यों के चयन की प्रक्रिया क्या हो.

लोकतांत्रिक मूल्यों का उदाहरण है 12वीं सदी के भगवान बसवेश्वर का अनुभव मंडपम

हमारे देश के इतिहास में लोकतांत्रिक मूल्यों का एक और उदाहरण है 12वीं सदी के भगवान बसवेश्वर का अनुभव मंडपम, यहां मुक्त चर्चा और विमर्श को प्रोत्साहन दिया जाता था. आपको यह जानकार हैरानी होगी कि यह राजा जॉन द्वारा दिए गए राजनीतिक अधिकारों के रॉयल चार्टर (माग्ना कार्टा) से भी पहले की बात है.

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