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हिमाचल प्रदेश चुनाव 2022: इन तीन कारणों से भाजपा चुनाव के पहले है टेंशन में

राजनीति राष्ट्रीय

हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 12 नवंबर को डाले जाने हैं लेकिन इससे पहले भाजपा की टेंशन कुछ ज्यादा ही बढ़ गयी है. दरअसल प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर है. हालांकि आम आदमी पार्टी यानी ‘आप’ भी मैदान में है लेकिन उतनी मजबूती से वह चुनावी रण में नजर नहीं आ रही है. पहाड़ी राज्य में पिछले पांच साल से सत्ता में मौजूद भाजपा कई दिक्कतों से जूझती दिख रही है.

यूं तो भाजपा फिर से सरकार बनाने का दावा कर रही है, लेकिन ऐसी तीन वजहें है जिसने उसकी बेचैनी बढ़ाकर रख दी है. पहला पहाड़ी हिमाचल प्रदेश के पिछले तीन दशक का चुनावी इतिहास यदि उठाकर आप देखेंगे तो आपको खुद समझ में आ जाएगा. दूसरा चुनावी मैदान में उतरने वाले भाजपा के बागी नेता हैं जबकि तीसरी वजह ओल्ड पेंशन स्कीम है. ये ऐसी तीन वजह है जो भाजपा को इन दिनों परेशान कर रहा है.

*भाजपा ने टिकट बंटवारे के दौरान, पिछला विधानसभा चुनाव जीतने वाले कई विधायकों और मंत्रियों के टिकट काटने का काम किया है. पार्टी कुछ नेताओं को तो मनाने में सफल रही है जबकि लगभग 20 बागी मैदान में डटे हुए हैं. राजनीति के जानकारों की मानें तो इन सीटों पर इन बागी नेताओं की काफी पकड़ है और वे कहीं न कहीं भाजपा को ही नुकसान पहुंचाते नजर आ सकते हैं.

*हिमाचल प्रदेश में पुरानी पेंशन स्कीम इन दिनों चर्चा में है जो बड़ा चुनावी मुद्दा बनता जा रहा है. कांग्रेस ने वादा किया है कि अगर प्रदेश में उनकी सरकार बनती है तो फिर कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम को लागू करने से वह पीछे नहीं हटेगी. कांग्रेस के शीर्ष नेता राजस्थान और छत्तीसगढ़ का उदाहरण देकर लोगों के बीच साख मजबूत कर रहे हैं, जहां पर पहले ही ओपीएस को लागू करने का काम किया जा चुका है. जानकारों की मानें तो हिमाचल प्रदेश में रिटायर्ड कर्मचारियों की बड़ी संख्या है जिस वजह से भाजपा के लिए चुनाव में दिक्कत हो सकती है.

*हिमाचल प्रदेश के चुनावी इतिहास को यदि आप उठाकर देखेंगे तो भाजपा की परेशानी का कारण आपको समझ में आ जाएगा. प्रदेश में हर पांच साल के बाद सत्ता परिवर्तन का ट्रेंड देखा गया है. पिछले तीन दशकों से एक पार्टी की सरकार के बाद दूसरी पार्टी की सरकार यहां की जनता बनाती है. पहाड़ी राज्य हिमाचल के इतिहास पर नजर डालें तो यहां मध्य 80 के दशक से ही एक बार कांग्रेस तो अगली बार बीजेपी का कब्जा रहा है.

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