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गुजरात चुनाव 2022 : भाजपा के सामने ये हैं बड़ी चुनौतियां, जानें कमजोर और मजबूत पक्ष

राजनीति राष्ट्रीय

गुजरात में चुनाव की तारीख की घोषणा के बाद से सभी पार्टियां अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहीं हैं. गुजरात की सत्ता पर करीब 27 साल से काबिज भाजपा के लिए इस बार राह आसान नजर नहीं आ रही है. इस चुनाव में भाजपा के सामने कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी यानी ‘आप’ की भी चुनौती है.

गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव में सत्ता विरोधी लहर का सामना भाजपा को करना पड़ सकता है और पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के अलावा आक्रामक तरीके से मैदान में उतरी ‘आप’ के साथ भाजपा का मुकाबला होगा. भाजपा ने 1995 से लेकर लगातार छह बार चुनावी जीत दर्ज की है. आइए आज जानते हैं भाजपा के पास क्या खास है जो उसे जीत दिलाने में मदद कर सकता है और क्या ऐसा है जो उसके लिए नुकसान दायक साबित हो सकता है.

गुजरात में इस बार क्या है भाजपा की ताकत

-प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता का लाभ भाजपा को मिल सकता है.

-आरक्षण को लेकर हुए आंदोलन के चलते 2017 के चुनावों में भाजपा को पाटीदार समुदाय के गुस्से का सामना करना पड़ा था, लिहाजा पार्टी अब पाटीदारों तक अपनी पहुंच पर भरोसा कर रही है. पिछले साल सितंबर में भूपेंद्र पटेल को मुख्यमंत्री के पद पर बैठाने और आरक्षण आंदोलन के अगुआ हार्दिक पटेल को अपने पाले में लाने में भाजपा सफल रही थी जिसका लाभ पार्टी को मिल सकता है.

-भाजपा की गुजरात इकाई के पास बूथ स्तर तक एक मजबूत संगठनात्मक ढांचा तैयार है जो पार्टी के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है.

-सत्ताधारी भाजपा हिन्दुत्व, विकास और ‘‘डबल इंजन” की बदौलत तेज प्रगति के मुद्दों पर भरोसा कर रही है. शाह भाजपा की चुनावी तैयारियों पर पैनी नजर रखे हुए हैं. शाह को भाजपा का मुख्य रणनीतिकार भी माना जाता है.

-मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस प्रचार से गायब दिख रही है जबकि पार्टी नेता, राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में व्यस्त नजर आ रहे हैं.

भाजपा के कमजोर पक्ष
-भाजपा के पास एक मजबूत स्थानीय नेता की कमी है, जो प्रधानमंत्री मोदी की जगह ले सके.

-नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद 2014 से गुजरात में मौजूदा मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल सहित तीन मुख्यमंत्री बन चुके हैं. जबकि मोदी 13 साल तक मुख्यमंत्री के पद पर काबिज रहे.

-आम आदमी पार्टी यानी ‘आप’ और कांग्रेस द्वारा राज्य सरकार पर लगाये गये भ्रष्टाचार का असर चुनाव में भाजपा पर नजर आ सकता है.

-भाजपा को महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट जैसे मुद्दों पर जनता का सामना करना पड़ सकता है.

-‘आप’ के आक्रामक अभियान ने गुजरात की शिक्षा प्रणाली और स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में खामियां निकालने का प्रयास किया है.

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