Felix Toppo bishop

फेलिक्स टोप्पो के बिशप काल की रजत जयंती धूमधाम से मनी

राँची

रांची : संत मरिया महागिरजा में रांची महाधर्मप्रांत के महाधर्मअध्यक्ष बिशप फेलिक्स का बिशप के रूप में 25 साल पूरा करने के अवसर पर आज 2 अक्टूबर 2022 को ईश्वर को धन्यवाद देने के लिए पूरे रांची महाधर्मप्रांत के विश्वासियों ने महाधर्मअध्यक्ष का रजत जयंती बड़े धूमधाम से मनाया.

7 सितंबर 1968 को यीशु संगी धर्म समाज में पुरोहित बनने के लिए प्रवेश किया

महाधर्मअध्यक्ष फेलिक्स टोप्पो का जन्म 21 नवंबर 1947 को गुमला जिला के टोंगो के एक साधारण परिवार में हुआ. उसकी माता का नाम कैथरीन टोप्पो और पिता का नाम लियोस टोप्पो था. अपने पिता के 9 बच्चों में से उनका स्थान आठवां था. उन्होंने 7 सितंबर 1968 ईसवी को यीशु संगी धर्म समाज में पुरोहित बनने के लिए प्रवेश किया और 14 अप्रैल 1982 को उनका पुरोहित अभिषेक हुआ.

18 जुलाई 1997 को जमशेदपुर धर्म प्रांत के धर्म अध्यक्ष नियुक्त किए गए

उसके बाद 1997 तक विभिन्न रूपों से कलीसिया की सेवा की और 18 जुलाई 1997 को वे जमशेदपुर धर्म प्रांत के धर्म अध्यक्ष नियुक्त किए गए. उस समय वे यीशु भवन मांगो मे नोभिस मास्टर के रूप में कार्यरत थे. 27 सितंबर 1997 को रांची के महाधर्मअध्यक्ष आर्चबिशप तेलेसफोर पी टोप्पो के द्वारा धर्मअध्यक्षीय अभिषेक हुआ.

6 अगस्त 2018 को रांची के महाधर्मअध्यक्ष के रूप में प्रतिस्थापन हुआ

तब से 6 अगस्त 2018 तक वे जमशेदपुर धर्मप्रांत के धर्मअध्यक्ष के रूप में काम किए. 22 जून 2018 को वे रांची महाधर्म प्रांत के महाधर्म अध्यक्षपद के लिए चुने गए. 6 अगस्त 2018 को संत मरिया महागिरजा घर में रांची के महाधर्मअध्यक्ष के रूप में उनका प्रतिस्थापन हुआ. तब से वे रांची महाधर्मप्रांत के महाधर्मअध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं. पुनीत अवसर पर बहुत सारे विश्वासी उपस्थित होकर ईश्वर को धन्यवाद दिए और आर्चबिशप को बधाइयां दीं.

मिस्सा बलिदान के मुख्य अनुष्ठाता स्वयं आर्चबिशप थे

समारोह की शुरुआत पवित्र मिस्सा बलिदान के साथ शुरू हुआ. मिस्सा बलिदान के मुख्य अनुष्ठाता स्वयं आर्चबिशप थे और उनके साथ खूंटी, सिमडेगा, दुमका, पोर्ट ब्लेयर और जमशेदपुर के बिशप गुमला के एडमिनिस्ट्रेटर, तथा रांची के सहायक बिशप थ्योयोदर मसकरेनहस उपस्थित थे. साथ- साथ विभिन्न धर्म समाज के प्रोविंशियल, मेजर सुपीरियर पुरोहित, धर्मबहने और विश्वासीगण मौजूद थे. मिस्सा बलिदान के बाद संत जोसेफ क्लब हॉल में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जहां बहुत सारे कल्चरल प्रोग्राम प्रस्तुत किए गए और लोगों ने एक-एक करके बिशप स्वामी को बधाई और शुभकामनाएं दी.

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